कुंदन कुमार, पटना। आम जनता की प्रशासनिक और व्यक्तिगत समस्याओं के तुरंत निपटारे के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सचिवालय में राज्यस्तरीय सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। महीने के दूसरे मंगलवार को आयोजित इस जनसुनवाई में राज्य के कोने-कोने से आए फरियादियों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने अपनी शिकायतें और समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने हर नागरिक की बात को गंभीरता से सुना और मौके पर ही संबंधित विभागों के मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों को समस्याओं के समयबद्ध व असरदार समाधान के स्पष्ट निर्देश दिए।

​जनसुनवाई के साथ तुरंत कार्रवाई पर जोर

​इस पहल को महज़ औपचारिकता न बनाकर सीधे समाधान से जोड़ा गया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे केवल आवेदन स्वीकार करने का जरिया नहीं, बल्कि शिकायतों पर सीधा एक्शन लेने की प्रणाली के रूप में देखा जा रहा है। शिविर में राजस्व, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस प्रशासन से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं। मुख्यमंत्री ने मौजूद मंत्रियों और अधिकारियों से कहा कि कागजी प्रक्रियाओं में उलझाने के बजाय जमीनी स्तर पर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि फरियादियों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

​दूर-दराज से पहुंचे लोगों की उम्मीदें

​बिहार के सुदूर ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों से पटना तक का सफर तय करना आम लोगों के लिए आसान नहीं होता। इसके लिए लोगों को न केवल आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, बल्कि अपनी दिहाड़ी, कृषि कार्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को छोड़कर आना पड़ता है। ऐसे में ‘सहयोग शिविर’ में पहुंचने वाले हर नागरिक को यह भरोसा रहता है कि शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने से उनकी सालों पुरानी उलझनें सुलझ सकेंगी। सचिवालय में लोगों के लिए की गई व्यवस्था और मुख्यमंत्री की सीधे संवाद की शैली ने फरियादियों में एक नई उम्मीद जगाई है।

​जमीनी क्रियान्वयन पर टिकेगी सफलता

​प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में यह ‘सहयोग शिविर’ एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का धरातल पर कितना असर दिखता है। आम जनता की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि सचिवालय से जारी हुए आदेशों पर निचले स्तर के अधिकारी कितनी तत्परता से काम करते हैं और फरियादियों को कब तक राहत मिलती है।