जीवन सूक्त : प्रत्येक पर्व के पीछे छिपे संदेश को समझ कर उस पर्व को मनाना ही उस दिन विशेष की सार्थकता होती है। कठिन जीवन पथ में दीप बालने में मदद करने वाला होता है नरक चतुर्दशी का दिन। छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस जैसे नाम भी इसी पर्व के हैं। नरक चतुर्दशी, एक संदेश है कि घरों में उजाला दीप से मगर अंतरतम में उजाला अपने सदविचार और निज- व्यवहार से आता है। इसपर कुछ कहावत है A good deed is never lost कोई भी सत्कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता। और Where there is light, there is hope. इसका भी मतलब साफ़ है जहाँ प्रकाश है, वहाँ आशा है।
पौराणिक मान्यता कहती है कि नरक चतुर्दशी वह दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध कर उसके आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। नरकासुर के वध में छुपा हुआ संदेश है कि अन्यायी और अहंकारी चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों सत्य और धर्म की उस पर विजय निश्चित है। इसी दिन मां काली ने दुष्ट शक्तियों का संहार कर नरक चौदस को काली चौदस भी बना दिया । इन प्रसंगों को आधार देने वाली अँग्रेज़ी की पंक्ति Courage is not the absence of fear, but the triumph over it का अर्थ है साहस भय का न होना नहीं बल्कि भय पर विजय पाना है।
दक्षिण दिशा में दीप जलाकर, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना के साथ यमराज के निमित्त दीपदान, जीवन की अनिश्चितताओं को स्वीकारते हुए प्रत्येक क्षण के सदुपयोग की प्रेरणा देता है।
बहुत सी परंपराओं में इसी दिन सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित कर की जाने वाली हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है जो मानव मन में श्रद्धा, समर्पण और सेवाभाव को बढ़ाता है। हनुमान भक्ति हमें साहस, संयम, निष्ठा और निःस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाती है।
स्नान की एक प्राचीन आयुर्वेदिक और धार्मिक परंपरा है अभ्यंग स्नान। ये स्नान मुख्य रूप से कार्तिक मास की नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के दिन सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। उबटन लगाकर स्नान करने की इस पुरानी परंपरा के पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर की त्वचा निखरती है और सौंदर्य में वृद्धि होती है इसीलिए इसे ‘रूप चौदस‘ भी कहते हैं। यह प्राचीन परंपरा व्यक्ति को तन-मन की स्वच्छता के लिए जागरूक बनाती है। आइए, इस छोटी दिवाली पर और भी कुछ अच्छे काम करें, ईर्ष्या, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे आंतरिक अंधकार से मुक्ति पाएँ। जरूरतमंदों की सहायता करें और सदाचार को अपनाते हुए रिश्तों में मिठास घोलें।
दीपदान से निर्भयता, हनुमान भक्ति से साहस और नरकासुर वध से बुराइयों पर विजय का संदेश देने वाले इस पर्व की सभी को शुभकामनाएँ।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

