When seconds count, preparation matters. मानव जीवन की सबसे बड़ी संरक्षक है प्रकृति लेकिन जब उसका संतुलन बिगड़ता है तो वही प्रकृति संसार के लिए बड़ी चुनौती भी बन जाती है। समुद्र की विशाल लहरों पर सवार होकर आने वाली सुनामी इसका एक भयावह उदाहरण है। सुनामी जैसी आपदाएँ केवल तटीय क्षेत्रों की समस्या नहीं बल्कि समूचे प्राणी जगत के लिए चेतावनी भी होती है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ और आपदाओं के प्रति लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है। A stitch in time saves nine. इस पंक्ति का सार है सही समय पर सुरक्षा के लिए उठाया गया छोटा कदम बड़ी मुसीबत से बचाने वाला होता है।
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। सजगता के महत्व को समझाने वाले संस्कृत के इस सुभाषित का अर्थ है ‘उठो, जागो और अपने लक्ष्य तथा कर्तव्य के प्रति सजग बनो।’ हर वर्ष आज के दिन यानी 5 नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2015 में इसकी घोषणा की और 2016 से इसकी शुरुआत हुई। इस दिन का उद्देश्य ही प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लोगों को सचेत करना है। दिन विशेष को समर्पित अँग्रेज़ी की इस पंक्ति When seconds count, preparation matters. का अर्थ है ‘जब हर सेकंड कीमती हो, तब पूर्व तैयारी जीवन बचाती है।’
जापान की एक ऐतिहासिक घटना ‘इनामुरा-नो-ही’ ने लोगों को अच्छी तरह से सिखाया कि समय पर दी गई चेतावनी सैकड़ों जीवन बचा सकती है।वर्ष 1854 में एक किसान ने सुनामी के खतरे को भांपकर आग के संकेत से ग्रामीणों को ऊंचाई पर पहुंचाया था। बदलते परिवेश में चैतनयता, जागरूकता और चेतावनी का सम्मिश्रण ही जीवन की रक्षा कर सकता है।

Knowledge is the best protection against danger. इस proverb के मुताबिक़ खतरे से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार ज्ञान ही है। कठोर सच्चाई है Safety first, everything else second. यानी सुरक्षा सर्वोपरि है, बाकी सब उसके बाद।सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएँ जनहानि के साथ घर, खेती, मत्स्य व्यवसाय, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी वर्षों पीछे धकेल देती है। इसलिए पूर्व चेतावनी, सुरक्षित स्थानों की पहचान, मॉक ड्रिल और सामुदायिक प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हैं।Disaster preparedness saves lives. आपदा से पहले की तैयारी अनमोल जीवन बचाती है।
पिछले 10 वर्षों के दौरान भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में आए विनाशकारी चक्रवाती तूफानों और भीषण प्राकृतिक आपदाओं जैसे चक्रवात अर्नव, दतवाह, मौनथा, रेमल ,मिचौंग, बिपरजॉय, आसनी, ताउते,यास,अम्फान फनी/फेनी, गाजा ,ओखी वरदा , वायनाड भूस्खलन ,सिक्किम फ्लैश फ्लड तुर्किये-सीरिया भूकंप,चमोली ग्लेशियर आपदा ,शताब्दी की केरल बाढ़ आदि की पूर्व सूचना के लिए बहुत से सफल प्रयास किए जा रहे हैं। भारत ने भी वर्ष 2004 की विनाशकारी सुनामी से सबक लेकर अक्टूबर 2007 में हैदराबाद स्थित INCOIS के अंतर्गत भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र (ITEWC) स्थापित किया है। ये सभी शासकीय तैयारियाँ भी इसलिए है कि It is better to be prepared than to be surprised. अचानक संकट में पड़ने से बेहतर है पहले से तैयार रहना।
A wise man learns from the mistakes of others. बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों की गलतियों से सीखता है। जीवन सूक्त का संदेश है—आपदा आने के बाद पछताने से बेहतर है, संकट आने से पहले सजग होना। जागरूक नागरिक ही सुरक्षित समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करते हैं।मसला सिर्फ़ प्राकृतिक आपदा नही है बल्कि जीवन की विपत्तियाँ भी किसी आपदा से कम नही उसके लिए भी ऐसा ही कुछ प्रबंधन आवश्यक है।

संदीप अखिल सलाहकार संपादक न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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