पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ पूर्वजों और पितरों से जुड़े नियमों और मान्यताओं की चर्चा भी बढ़ जाती है। ज्योतिष में पितृ दोष को कुंडली से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय माना गया है । इसके प्रभाव को लेकर कई तरह के संकेत बताए गए हैं, जो व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन से लेकर घर के माहौल तक से जुड़े हो सकते हैं।
घर में पैसा आता है, लेकिन टिकता नहीं
पितृ दोष से जुड़े बताए गए संकेतों में आर्थिक परेशानी भी शामिल है। ऐसी स्थिति में आमदनी होने के बाबजूद बचत नहीं हो पाती। अचानक खर्च बढ़ना या बार-बार पैसों की जरूरत पड़ना आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है ।

परिवार में अनबन बार-बार होती है
घर का माहौल लगतार तनावपूर्ण रहना भी पितृ दोष के संकेतों में गिना जाता है। छोटी-छोटी बातों पर सदस्यों के बीच विबाद होना, आपसी मतभेद बढ़ना और बिना किसी बड़ी वजह के घर में अशांति बनी रहना इसके प्रमुख संकेतों में बताया जाता है।
घर के सदस्य बीमार रहते हैं
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में परिवार में बार-बार किसी न किसी सदस्य के बीमार रहने को भी पितृ दोष से जोड़ा संकेत भी कहा जाता है। लगातार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां रहने पर इलाज और दवाइयों का खर्च भी बढ़ सकता है।
बार-बार खराब होते हैं बल्ब
पितृ दोष से जुड़े कुछ ज्योतिषीय संकेत दैनिक जीवन की घटनाओं से भी जोड़े जाते हैं। इनमें घर के बल्ब या लाइट का बार-बार खराब होना। बिजली से जुड़े उपकरणों में लगातार परेशानी आना भी शामिल है।
अमावस्या से पहले बढ़ने लगता है तनाव
एक संकेत ये भी है कि पितृ दोष का प्रभाव अमावस्या के आसपास अधिक महसूस हो सकता है। खासतौर पर अमावस्या से कुछ दिन पहले घर में कलह, तनाव या बेचैनी बढ़ने को इसके संकेत के तौर पर बताया जाता है।
संतान से जुड़ी परेशानियां भी जोड़ी जाती हैं
पितृ दोष होने पर संतान पक्ष का भी उल्लेख मिलता है। बच्चों का बात न मानना, परिवार से दूरी बनाना या गलत संगत में पड़ना जैसी स्थितियों को भी कुछ ज्योतिषीय मतों में इससे जोड़कर देखा जाता है।यदि किसी व्यक्ति के जीवन में इस तरह की कई परेशानियां लगातार बनी हुई हैं, तो केवल इन संकेतों के आधार पर पितृ दोष मान लेना उचित नहीं है। ज्योतिष में कुंडली के ग्रह, भाव और उनकी स्थिति देखकर दोष का आकलन किया जाता है। पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा भी निभाई जाती है।

