Dharm Desk – बहुत बार घर-परिवार में बिना किसी वजह के परेशानिया आने लगती हैं।जैसे शादी में अकारण देरी होना, संतान प्राप्ति में बाधा, कारोबार या नौकरी में लगातार असफलता, या घर में हर समय अशांति का माहौल बने रहना। ज्योतिषीय दृष्टि से इसका महत्व दृष्टि से इन समस्याओं का एक प्रमुख कारण पितृ दोष माना जाता है। अगर जीवन में भी ऐसी परेशानी बार-बार आ रही हैं तो शास्त्रों और लोक कथाओं में इसके निवारण का एक बहुत आसान सरल व प्रभावी उपाय बताया गया है।

छठ और सप्तमी तिथि का विशेष संयोग

पितृ दोष की समस्या से मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष की षष्ठी और सप्तमी तिथि का बहुत बड़ा महत्व है।इसलिए पितृ पक्ष के दौरान आने वाली छठ तिथि के दिन एक कटोरी में गंगाजल भरें। यदि गंगाजल उपलब्ध न हो तो साफ-सुथरी कटोरी में साफ पीने का पानी लें और उसमें एक बेलपत्र डाल दें।

इसके बाद इस कटोरी को अपने घर के परिंडे के पास रखे मतलब वह स्थान जहा आप घर में पीने का पानी मटका रखते हैं। भारतीय संस्कृति में जल स्थान को पितरों का वास माना जाता है। इस कटोरी को छठ के पूरे दिन और रात वहीं रखे रहने दें।
अगले दिन यानी सप्तमी तिथि को प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों। इसके बाद उस कटोरी के जल को पूरे घर में थोड़ा-थोड़ा छिड़के घर में जल का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।

इसके बाद बचे हुए जल को पास के किसी शिवालय में जाकर भगवान शंकर के शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक चढ़ा दें।कहा जाता है कि देवों के देव महादेव पर इस पवित्र जल को अर्पित करने से कैसा भी कठिन पितृ दोष हो वह खत्म हो जाता है। भगवान शंकर की कृपा से घर-परिवार की सभी रुकावटें दूर होती हैं और सुख-समृद्धि के नए द्वार खुलते हैं।