हेमंत शर्मा, इंदौर। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने Archaeological Survey of India (एएसआई) द्वारा तैयार की गई विस्तृत सर्वे रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से अपने रिकॉर्ड पर ले लिया है। यह वही सर्वे रिपोर्ट है, जिसे 15 जुलाई 2024 को एएसआई ने कोर्ट में पेश किया था। रिपोर्ट कुल 2089 पेज की बताई जा रही है और इसे पहले ही कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका था। हालांकि अब तक इस पर किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक दावे या आपत्तियां सामने नहीं आई थीं।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का दावा क्या है?
मामले में पक्षकार संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का दावा है कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि करीब 1000 साल पहले तक यहां सनातन धर्म का अस्तित्व मौजूद था। संगठन का कहना है कि रिपोर्ट में संरचनात्मक अवशेष, स्थापत्य शैली और शिल्प के आधार पर मंदिर के अस्तित्व की पुष्टि होती है। हालांकि इन दावों पर अभी अदालत ने कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
आज की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एएसआई सर्वे रिपोर्ट की प्रतियां दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई हैं। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी पक्ष निर्धारित समय सीमा में अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव पेश करें। कोर्ट का यह कदम आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब रिपोर्ट के हर बिंदु पर विस्तृत बहस की संभावना है।
अगली सुनवाई कब?
इस संवेदनशील और लंबे समय से चल रहे विवाद की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है। माना जा रहा है कि अगली तारीख पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी आपत्तियां और दलीलें अदालत के सामने रख सकते हैं, जिससे मामले की दिशा तय होगी।
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