भारत के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. इससे पहले बीते कुछ महीनों में कई अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. भारत ऐसा अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए कर रहा है. भारत ने अपनी रक्षा और विदेश नीति में मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर की रणनीति अपनाई है. बीते कुछ महीनों के दौरान भारत ने रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ कई रक्षा सौदों को मंजूरी दी है. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और तकनीकी स्वायत्तता मजबूत हुई है. साथ ही भारत के इन चारों सुपरपावर्स के साथ रिश्ते भी नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं.
भारत ने अपनी इन रक्षा तैयारियों में अपनी पारंपरिक नीति से अलग एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. बीते कुछ महीनों के डेवलपमेंट को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि भारत ने मल्टीपोलर नीति में रूस के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे सुपरपावर्स को साधने का काम किया है. तकनीकी रूप से जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है लेकिन वह एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति और सैन्य शक्ति है.
भारत की इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक वैश्विक पावर पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए पूर्व और पश्चिम दोनों से सर्वश्रेष्ठ तकनीक हासिल करने की है. हाल के महीनों में रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ बड़े सौदों ने न केवल इन देशों को साधने का काम किया है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत किया है.
रूस भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद रक्षा साझेदार बना हुआ है. रूस मौजूदा वक्त में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का संयुक्त उद्यम इसका प्रमुख उदाहरण है.
जर्मनी भारत की अंडरवाटर डोमिनेंस में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. प्रोजेक्ट-75(I) के तहत थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन का सौदा करीब $8-10 बिलियन (70,000-90,000 करोड़) का है. जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यात्रा के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए और मार्च तक यह सौदा फाइनल होने की उम्मीद है.
अमेरिका के साथ संबंध खरीदार-विक्रेता से व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच चुके हैं. GE-F414 जेट इंजन सौदा सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू है, जिसमें HAL के साथ 80 फीसदी तकनीक ट्रांसफर की बात चल रही है. यह सुविधा पहले केवल NATO सहयोगियों को मिलती थी.
फ़्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद पश्चिमी साथी साबित हुआ है. जहां तकनीक साझा करने में कोई शर्त नहीं लगाई जाती. 36 राफेल फाइटर की सफल खरीद के बाद रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने गुरुवार को 114 राफेल जेट्स की मंजूरी दी है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है. इनमें से ज्यादातर भारत में निर्मित होंगे, जिसमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी.
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