अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 16वां दिन है। इस वजह से जहाजों को खाड़ी देशों से ऑयल लाने में दिक्कत हो रही है। भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक शनिवार को UAE के ‘फुजैराह ऑयल टर्मिनल’ पर हमला हुआ था। इस दौरान भारतीय झंडे वाला जहाज ‘जग लाड़की’ वहां तेल भर रहा था। जहाज पर मौजूद सभी भारतीय स्टॉफ सुरक्षित हैं। जहाज ने लगभग 80,800 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल लोड किया और अब सुरक्षित रूप से भारत की ओर रवाना हो गया है।
वहीं, ईरान ने रविवार को इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइल के टुकड़े गिरने से उस इमारत को नुकसान पहुंचा है, जहां अमेरिकी डिप्लोमेट काम करते हैं। हालांकि यह नहीं बताया गया कि यह इमारत किस शहर में है। इजराइल में अमेरिका का दूतावास यरुशलम में है और तेल अवीव में भी उसका एक बड़ा दफ्तर है।
जहाज पर लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल
‘जग लाडकी’ नाम का यह जहाज, जिसमें लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल है, फुजैराह से भारतीय समय के अनुसार 10.30 बजे निकला और इस पर सवार सभी सदस्य सुरक्षित हैं, और अब यह भारत के लिए रवाना हो गया है। ‘जग लाडकी’ चौथा भारतीय ध्वजवाहक जहाज है जो युद्ध क्षेत्र से बिना किसी नुकसान के बाहर निकला है।
तैयारी के उपायों पर केंद्र सरकार ने कहा कि इसके अलावा, सुरक्षित रास्ता भारतीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। होर्मुज स्ट्रेट में पोत परिवहन की दिक्कतों ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है।
सरकार ने कहा, ”14 मार्च, 2026 को, जब भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी फुजैराह सिंगल पॉइंट मूरिंग पर कच्चा तेल भर रहा था, तो तेल टर्मिनल पर हमला हुआ। जहाज आज (रविवार) 10.30 बजे फुजैराह से लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हुआ।”
दो जहाज पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं
बयान में कहा गया है कि जहाज और उसमें सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। शनिवार को, दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ – लगभग 92,712 टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। सूचना के अनुसार, शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेगा, और नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर लंगर डालेगा।
ये दोनों जहाज़ उन 24 जहाजों में शामिल थे जो इस क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। पश्चिमी इलाके पर 24 के अलावा, पूर्वी क्षेत्र में चार और जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी इलाके में पर चार में से भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग प्रकाश, जो ओमान से अफ्रीका पेट्रोल ले जा रहा था, शुक्रवार को युद्ध प्रभावित इलाके को पार कर गया।
फारस की खाड़ी में 22 भारतीय जहाज फंसे
जग प्रकाश ने ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लिया था और अब यह तंजानिया के टांगा जा रहा है। यह 21 मार्च को टांगा पहुंचने वाला है इस इलाके में काम कर रहे भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं, और समुद्री परिचालन पर करीब से नजर रखी जा रही है। अभी, फारस की खाड़ी इलाके के पश्चिम की ओर 22 भारतीय ध्वजवाहक जहाज हैं जिन पर 611 नाविक हैं।
भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी ज़रूरतें आयात से पूरी करता है। ईरान जंग से पहले भारत का आधे से ज़्यादा कच्चा तेल आयात, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85-90 प्रतिशत एलपीजी आयात सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था।
ईरान जंग से भारत में ईंधन का संकट!
ईरान की लड़ाई की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्यम बंद हो गया है, जो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल मंगाकर कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार किया है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति कम कर दी गई है। होटल और रेस्तरांओं के लिए भी एलपीजी में कमी की गई है। सरकार ने कहा है कि पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरएसपीएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर स्थिति पर नज़र रख रहा है।
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