हेमंत शर्मा, इंदौर। हाईकोर्ट ने इंदौर और उज्जैन से जुड़े बाल आश्रय गृह मामले में बड़ा आदेश देते हुए 17 बच्चों की मौत के मामले में जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस प्रकरण को गंभीर संवैधानिक मुद्दा माना और संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है। अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा मामला
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने माना कि यह मामला बच्चों के जीवन और सुरक्षा के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। एक वर्ष के भीतर 17 बच्चों की मौत को कोर्ट ने अत्यंत चिंताजनक बताया।
युगपुरुष धाम से सेवाधाम तक: मौतों का सिलसिला
इंदौर के युगपुरुष धाम में 10 दिव्यांग बच्चों की मौत के बाद 86 बच्चों को उज्जैन स्थित सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया था। लेकिन शिफ्ट किए गए 86 बच्चों में से ही 17 बच्चों की एक साल के भीतर मौत हो गई। लगातार मौतों ने प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन अधिकारियों को नोटिस
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, पुलिस अधीक्षक उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा सेवाधाम आश्रम प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।सभी से दो सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा गया है कि बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या कदम उठाए गए।
12 मार्च को अगली सुनवाई
उज्जैन के सेवाधाम आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट आने के बाद 12 मार्च को अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आगे कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
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