हेमंत शर्मा, इंदौर। दिगंबर जैन समाज के प्रमुख तीर्थस्थल गोमटगिरी के विकास और प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। गोमटगिरी ट्रस्ट मंडल के सभी 25 सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर सहमति जताई है। ट्रस्ट मंडल की ओर से यह प्रस्ताव संत सुधासागर महाराज के समक्ष रखा गया। बताया गया कि गोमटगिरी के विकास में आ रही कथित अड़चनों को दूर करने और ट्रस्ट व्यवस्था में बदलाव के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
सुधासागर महाराज के सामने हुआ फैसला
सुधासागर महाराज के समक्ष हुई चर्चा में गोमटगिरी के विकास और ट्रस्ट व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श हुआ। इसी दौरान ट्रस्ट मंडल के सभी 25 सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के प्रस्ताव पर सहमति जताई। महाराज ने चर्चा के दौरान कहा कि यदि विवाद का समाधान करना है तो पहले सभी को मोह छोड़कर निर्णय लेना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि गोमटगिरी का विकास करवाना उन्हें आता है। अब इस फैसले के बाद नए ट्रस्टियों के गठन का रास्ता तैयार होने की बात कही जा रही है।
देशभर से चुने जाएंगे नए ट्रस्टी?
प्रस्ताव के मुताबिक, देशभर के दिगंबर जैन समाज के प्रमुख भामाशाहों और समाजसेवियों में से नए ट्रस्टियों के चयन की प्रक्रिया की जा सकती है। इसके पीछे उद्देश्य गोमटगिरी की ट्रस्ट व्यवस्था में नए लोगों को जिम्मेदारी देकर तीर्थ के विकास कार्यों को गति देना बताया गया है। यानी लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अर्जुन सिंह के कार्यकाल से जुड़ा है गोमटगिरी का इतिहास
गोमटगिरी सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि देशभर के दिगंबर जैन समाज के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। समाज के वरिष्ठ सदस्य बाबूलाल पाटोदी के प्रयासों से तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में यह पहाड़ी दिगंबर जैन समाज को प्राप्त हुई थी। इसके बाद यहां तीर्थ विकास को लेकर लगातार अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जाते रहे। अब ट्रस्ट मंडल के सभी सदस्यों के सामूहिक इस्तीफे की सहमति के बाद एक बार फिर गोमटगिरी के विकास और प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था की चर्चा शुरू हो गई है।
गोमटगिरी की जमीन को लेकर विवाद भी अदालत में
गोमटगिरी की भूमि को लेकर गुर्जर समाज के साथ कब्जे का विवाद भी लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है। ऐसे में ट्रस्ट मंडल के सामूहिक इस्तीफे का फैसला केवल ट्रस्ट व्यवस्था में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि गोमटगिरी के भविष्य के विकास, प्रबंधन और उससे जुड़े विवादों के बीच भी इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल- नई कमान किसके हाथ?
25 ट्रस्टियों के सामूहिक इस्तीफे की सहमति के बाद अब नजर इस बात पर है कि नए ट्रस्टियों का गठन कब होता है और गोमटगिरी के विकास की नई कार्ययोजना क्या होगी। क्या नई ट्रस्ट व्यवस्था पुराने विवादों को सुलझाकर विकास की रफ्तार बढ़ा पाएगी? क्या नए भामाशाहों और समाजसेवियों को जिम्मेदारी मिलने से गोमटगिरी में बड़े स्तर पर विकास कार्य शुरू होंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल 25 ट्रस्टियों का एक साथ इस्तीफे पर सहमत होना गोमटगिरी के प्रबंधन में बड़े बदलाव का संकेत जरूर है।
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