इंदौर। इंदौर नगर निगम में पानी के टैंकर के बिल के भुगतान से जुड़े मामले में लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नगर निगम के उपयंत्री हर्ष गहलोत को कथित तौर पर 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया है। आरोपी नगर निगम के जोन क्रमांक 13 में पदस्थ बताया गया है। शिकायतकर्ता सोहेल पटेल का आरोप था कि टैंकर के तीन महीने के बकाया बिल का भुगतान कराने के लिए लॉगबुक सत्यापन के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही थी।

लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता का नगर निगम में पानी का टैंकर अटैच था। इसके तीन महीने का कुल 1 लाख 12 हजार 500 रुपये का बिल भुगतान के लिए लंबित था। बिल की राशि पास कराने के लिए लॉगबुक का सत्यापन होना था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया के लिए उपयंत्री हर्ष गहलोत ने 6 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त का ट्रैप

शिकायतकर्ता सोहेल पटेल, निवासी नायता मुंडला, इंदौर ने इस मामले में लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त इंदौर के समक्ष पहुंचने के बाद उसका सत्यापन कराया गया। लोकायुक्त के अनुसार, सत्यापन में रिश्वत मांगने संबंधी शिकायत सही पाए जाने पर कार्रवाई की गई।28 अक्टूबर 2026 को लोकायुक्त की टीम ने चाणक्यपुरी चौराहे पर हनुमान मंदिर के सामने कार्रवाई करते हुए उपयंत्री हर्ष गहलोत को शिकायतकर्ता से 5 हजार रुपये लेते हुए ट्रैप किया। शिकायत में रिश्वत की मांग 6 हजार रुपये बताई गई थी, जबकि कार्रवाई के दौरान 5 हजार रुपये की राशि लेते हुए पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम, 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। कार्रवाई के समय लोकायुक्त की टीम मौके पर मौजूद थी और आगे की कार्रवाई जारी थी।यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई। ट्रैप दल में निरीक्षक आशुतोष मिठास, प्रधान आरक्षक रणजीत द्विवेदी, विजय सैलार, विवेक मिश्रा तथा आरक्षक मनीष माथुर और पवन पटोरिया शामिल थे।

टैंकर का बिल पास कराने के लिए रिश्वत का आरोप

इस मामले में खास बात यह है कि शिकायतकर्ता का पानी का टैंकर नगर निगम में अटैच था और उसके तीन महीने के बिल का भुगतान लंबित था। बिल पास कराने की प्रक्रिया में लॉगबुक सत्यापन की भूमिका थी। शिकायतकर्ता ने इसी काम के बदले रिश्वत मांगे जाने का आरोप लगाया था।लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की जांच की जाएगी। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

रिश्वत मांगे तो लोकायुक्त से करें शिकायत

लोकायुक्त संगठन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस इंदौर से की जा सकती है। नगर निगम से जुड़े इस मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी कामकाज में कथित रिश्वतखोरी की शिकायतों को चर्चा में ला दिया है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि बिल सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया में रिश्वत मांगने के आरोप से जुड़े सभी तथ्य क्या हैं।

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