रामपुर की मेहताब ने धर्म परिवर्तन के बाद ममता नाम अपनाया और बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में जागेश पुरी से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया. मेहताब के मुताबिक, अलग-अलग धर्म होने के कारण परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था और उन्होंने अपनी इच्छा से शादी का फैसला लिया.
रामपुर. जिले की मेहताब ने धर्म परिवर्तन के बाद ममता नाम अपनाया और मुरादाबाद निवासी जागेश पुरी से शादी कर ली. बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में आचार्य केके शंखधार ने दोनों का हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराया. मेहताब ने शादी के बाद कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था.
ऐसे हुई दोनों की मुलाकात
मेहताब ने बताया कि वह रामपुर की रहने वाली हैं और आठवीं तक पढ़ी हैं. उनके परिवार में छह भाई-बहन हैं. उनके अनुसार, मुरादाबाद के रहने वाले जागेश पुरी काम के सिलसिले में उनके गांव आते थे, इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई.

बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच संबंध बने और बाद में उन्होंने शादी करने का फैसला किया. मेहताब के मुताबिक, परिवार के सामने शादी की बात रखने पर अलग-अलग धर्म होने के कारण परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुए.
परिवार की सहमति नहीं मिली
मेहताब ने बताया कि परिवार की असहमति के बाद दोनों ने साथ रहने और विवाह करने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से हिंदू धर्म में आस्था रखती हैं और भोले की पूजा करती रही हैं.
इसके बाद मेहताब और जागेश बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे. वहां उन्होंने आचार्य केके शंखधार से विवाह कराने का आग्रह किया.
धर्म परिवर्तन के बाद विवाह
आश्रम में आचार्य ने दोनों से बातचीत की और उनकी बालिग होने से संबंधित प्रमाणपत्र देखे. इसके बाद मेहताब ने धर्म परिवर्तन कर अपना नाम ममता रख लिया.
धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आचार्य केके शंखधार ने दोनों का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह कराया. विवाह के दौरान दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की सहमति जताई.

मेहताब ने क्या कहा
शादी के बाद मेहताब ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन किया है और किसी ने उन पर दबाव या जोर-जबरदस्ती नहीं की. उन्होंने कहा कि वह अपनी मर्जी से जागेश के साथ विवाह कर रही हैं और आगे का जीवन उनके साथ बिताना चाहती हैं.
वहीं, जागेश पुरी ने भी मेहताब का जीवनभर साथ निभाने की बात कही.

