‘सामग्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी में समकालीन प्रथाओं‘ पर, आईएसबीएम विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन

रायपुर। आईएसबीएम विश्वविद्यालय नवापारा कोसमी द्वारा ‘‘सामग्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी में समकालीन प्रथाओं‘‘ पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आई.एस.बी.एम. विश्वविद्यालय में शिक्षा के बेहतर विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार 21 दिसंबर को विज्ञान अध्ययनशाला और विज्ञान क्लब के तत्वाधान में यह इंटरनेशनल ई कांफ्रेंस आयोजित की गई जिसमें देश-विदेश से अनेक विद्वान शामिल हुए।

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विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार राकेश तिवारी ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत विश्वविद्यालय के वर्चुअल भ्रमण से हुई। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. विनय अग्रवाल ने ई- संगोष्ठी में शामिल सभी वक्ताओं स्वागत किया एवं इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुये अपने संबोधन में कहा कि कोविड-19 संक्रमण काल में विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक गतिविधियों को ऑनलाइन मोड पर संचालित किया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की यह ई-संगोष्ठी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की ज्ञान वृद्धि के लिए समय-समय पर आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी हैै।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि साउथ अफ्रीका जोहानसबर्ग विश्वविद्यालय भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर एलिटा प्रिंसलू और प्रोफेसर चर्लिस शेपर्ड थे । सेमीनार को संबोधित करने हुये उन्होंने कहा कि 21वीं सदी नैनो सदी बनने जा रही है। आज वस्तुओं के आकार को छोटा और मजबूत बनाने की होड़-सी मची हुई है। विभिन्न क्षेत्रों में नैनो तकनीक विकसित करने के लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं। अति सूक्ष्म आकार, बेजोड़ मजबूती और टिकाऊपन के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, ऑटो, बायोसाइंस, पेट्रोलियम, फॉरेंसिक और डिफेंस जैसे तमाम क्षेत्रों में नैनो टेक्नोलॉजी की असीम संभावनाएं बन रही हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ. मारता मिशेल्सका डोमन्स्का, वर्साव, पोलैंड थी। बॉयोमेडिकल टाइटेनियम मिश्र धातुओं का एनोडाइजेशन विषय से संबंधित विषय पर विचार व्यक्त करते उन्होने कहा कि टाइटेनियम मिश्र धातु, विमान इंजन से लेकर मानव शरीर के अंदर यांत्रिक प्रत्यारोपण तक अनेक उत्पादों में उपयोग किए जाते हैं। उनका व्यापक उपयोग टिकाऊ, कठोर, हल्के वजन, संक्षारण और जैव-संगत प्रतिरोधी होने की उनकी अनूठे गुणों के कारण होता है।

विशेष अतिथि बेल्जियम के डॉ. बी. लतीफ एवं लॉवेल के प्रो. कृष्णा वेदुला ने कहा कि मानव और समाज का जीवन सुखमय बनाने के लिए प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी अविष्कारों की आवश्यकता है जिससे सकारात्मक परिणाम प्राप्त किया जा सके। प्रोफेसर कृष्णा ने विश्व में परमाणु ऊर्जा की आश्चर्यजनक प्रगति एवं इसके कृषि एवं चिकित्सा जैसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए किए जाने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताई तथा वर्तमान में इस क्षेत्र में रोजगार के अधिक संभावनाओं से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर कुसुमांजलि देशमुख , गवर्मेंट महाविद्यालय, इस्पात नगरी, जामुल भिलाई और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित भिलाई प्रौद्योगिकी संस्थान के प्राध्यापक डॉ विकास दुबे द्वारा किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी में भारत के अलावा विश्व के अन्य देशों बेल्जियम ,तुर्की, कनाडा से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद महलवार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से आम जीवन में आए परिवर्तनों तथा प्रौद्योगिकी के विकास से होने वाले लाभों के प्रति अपना विचार व्यक्त किये वहीं संगोष्ठी के संयोजक डॉ. एन.के.स्वामी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम के सहसंयोजक प्रो. ओमप्रकाश वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

कुलसचिव डॉ. बी. पी. भोल ने विज्ञान के बढ़ते प्रभाव पर संक्षिप्त व्याख्यान दिया एवं कार्यक्रम में सहभागिता के लिये समस्त वक्ताओं, कर्मचारियों, कार्यकर्ताओ, प्रतिभागियों और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोगियों तथा कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिये विष्वविद्यालय के प्राध्यापकगण गोकुल प्रसाद , प्रवीण यादव, आर.के. देशमुख, चंद्रशेखर कुर्रे, दीपेश, गरिमा दीवान एवं डायमंड साहु सहित अन्य कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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