Iran-US Tension: ईरान की धड़कने इस वक्त बढ़ी हुईं हैं. अमेरिकी नौसेना ने अपनी रणनीतिक तैनाती में बड़ा बदलाव करते हुए USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हटाकर अब मध्य पूर्व में तैनात कर दिया है. इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है, जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर वैश्विक दबाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. जानकार कह रहे हैं कि, अमरिकी नौसेना को सिर्फ ट्रंप के इशारे का इंतजार है.
कितना विध्वंसक है USS Abraham Lincoln?
USS Abraham Lincoln, जिसे CVN-72 के नाम से जाना जाता है, निमिट्ज-क्लास का न्यूक्लियर एनर्जी से ऑपरेट होने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह अमेरिकी नौसेना के Carrier Strike Group-3 का नेतृत्व करता है. इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली समुद्री टुकड़ियों में गिना जाता है. 19 जनवरी को यह स्ट्राइक ग्रुप मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरा. इस दौरान इसकी सुरक्षा के लिए तीन अत्याधुनिक Arleigh Burke-class guided missile destroyers तैनात किए गए थे, जिनमें USS Frank E. Petersen Jr, USS Spruance और USS Michael Murphy शामिल हैं. अमेरिकी Central Command यानी CENTCOM ने इस तैनाती को मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर बढ़ाया दबाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य जमावड़े को ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार उल्लंघनों से जोड़कर देखा है. दिसंबर से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिनमें हजारों लोगों की मौत और गिरफ्तारी के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि ईरान सरकार इन आंकड़ों को सिरे से खारिज करती रही है. ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि अमेरिका की एक बहुत बड़ी नौसैनिक ताकत उस क्षेत्र की ओर बढ़ रही है और संभव है कि इसका इस्तेमाल न करना पड़े, लेकिन अमेरिका हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है. इस बयान को अमेरिका की शो ऑफ फोर्स नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सैन्य दबाव और रणनीतिक अनिश्चितता दोनों शामिल हैं.
पेंटागन ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां
USS Abraham Lincoln की तैनाती के साथ-साथ पेंटागन ने ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर दिया है. क्षेत्र में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है और सैन्य कार्गो उड़ानों के जरिए लॉजिस्टिक सपोर्ट भी बढ़ाया गया है. इससे अमेरिका को हवाई हमले, सटीक मिसाइल स्ट्राइक और मजबूत डिटरेंस विकल्प उपलब्ध हो गए हैं.
ईरान की चेतावनी और मध्य पूर्व में बढ़ती चिंता
ईरान ने अमेरिकी तैनाती पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उस पर कोई सैन्य हमला किया गया तो उसका जवाब निर्णायक और कठोर होगा. इस चेतावनी के बाद पूरे मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ गई है.
क्या कूटनीति का रास्ता अब भी खुला है
तनावपूर्ण हालात के बावजूद अमेरिका ने संकेत दिया है कि बातचीत का विकल्प अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि ईरान को अच्छी तरह पता है कि बातचीत के लिए शर्तें क्या होंगी और अब फैसला तेहरान को करना है.
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