मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तेज होता युद्ध अब समुद्री व्यापार की धमनियों को काट रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा है. ईरान का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त बंदरगाह बंदर अब्बास अब लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है. जहाजों पर बीमा कवर रद्द हो रहा है और फ्रेट रेट्स दोगुने से ज्यादा हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा झटका भारत के बासमती चावल निर्यात को लगा है, जहां ईरान दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और बंदर अब्बास पोर्ट से ही अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान जैसे लैंडलॉक देशों तक सप्लाई होती थी.
US, इजरायल- ईरान युद्ध के चलते ईरान का महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास अब लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा है. भारत के बासमती चावल निर्यात पर संकट गहराया है.
मीडिया से बातचीत में प्रमुख निर्यातकों ने बताया कि बंदर अब्बास पर हजारों कंटेनर फंसे पड़े हैं. बासमती निर्यातक शोभित ने कहा, ‘ईरान दुनिया का सबसे बड़ा बासमती आयातक है. बंदर अब्बास से हमारे चावल न सिर्फ ईरान पहुंचते थे, बल्कि मध्य एशिया के कई देशों तक ट्रांजिट होते थे. अब 4 से 5 हजार कंटेनर वहां अटके हैं. कुछ पेमेंट आ चुकी है, लेकिन ज्यादातर माल और पैसा दोनों फंसे हुए हैं.
बासमती निर्यातक शोभित ने बताया, ‘कुल 10-11 लाख क्विंटल बंदर अब्बास पर और भारत के पोर्ट्स पर 7-8 लाख क्विंटल – मतलब 18-20 लाख क्विंटल स्टॉक जोखिम में है.
दूसरे निर्यातक मोहम्मद मिनाज ने अपनी मुश्किल बताई, ‘हमारे 30-40 कंटेनर बंदर अब्बास के लिए निकले थे. कुछ अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान जाना था. लेकिन अब शिप UAE के किसी और पोर्ट पर ट्रांजिट में रोक दी गई है. सबसे बड़ी दिक्कत ईरान में इंटरनेट बंद होना है. बायर से बात नहीं हो पा रही. शिप पर क्रू फंसे हैं, लेकिन हमारी उनसे कोई संपर्क नहीं.’
राइस एक्सपोर्टर शोभित जैन ने आगे बताया कि फ्रेट रेट्स दोगुने हो गए, बीमा कंपनियां कवर रद्द कर रही हैं और अगर किसी जहाज पर हमला हुआ तो ‘नल एंड अवॉइड’ क्लॉज से पूरा नुकसान निर्यातकों पर. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल करीब 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल पोर्ट्स पर या ट्रांजिट में फंसा हुआ है, जिसमें बंदर अब्बास सबसे बड़ा केंद्र है.
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