आजकल सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव हो रहा है, लेकिन Copper ने पिछले साल इन्वेस्टर्स को अच्छा-खासा प्रॉफिट दिया है. मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद, कॉपर की डिमांड लगातार बनी हुई है, इसीलिए इसे अब अगला “मार्केट किंग” कहा जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि भविष्य में Copper की डिमांड और बढ़ेगी. इसका कारण यह है कि आज की दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रही है. इन सभी सेक्टर्स में कॉपर का अहम रोल है.

AI और इलेक्ट्रिक गाड़ियां डिमांड बढ़ाती हैं

AI इम्पैक्ट समिट 2026 अभी भारत में चल रहा है, जिसमें दुनिया की कई बड़ी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. यह AI टेक्नोलॉजी की तेज़ी से हो रही तरक्की को दिखाता है.

AI वाले डेटा सेंटर्स को स्टैंडर्ड सर्वर्स के मुकाबले 30 से 50 गुना ज़्यादा Copper की जरूरत होती है. कॉपर का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों, पावर ग्रिड्स, सोलर प्लांट्स और इंडस्ट्रियल मशीनरी में भी बड़ी मात्रा में होता है. इसीलिए इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है.

डिमांड और बढ़ सकती है

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, 2030 तक, अकेले AI सेक्टर को हर साल लगभग 500,000 मीट्रिक टन Copper की जरूरत होगी. इससे साफ़ पता चलता है कि आने वाले सालों में कॉपर की डिमांड बढ़ने वाली है. इस वजह से, इन्वेस्टर अब इसे सिर्फ़ एक मेटल के तौर पर नहीं, बल्कि एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर देख रहे हैं.

कमजोर सप्लाई, कीमतों पर असर

जहां डिमांड तेजी से बढ़ रही है, वहीं सप्लाई पीछे चल रही है. कई खदानों में प्रोडक्शन कम हो गया है, और नए माइनिंग प्रोजेक्ट धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ रहे हैं. इसके अलावा, हाल ही में लूनर न्यू ईयर की वजह से चीनी मार्केट में मंदी आई थी. 23 फरवरी के बाद वहां मार्केट के फिर से खुलने पर इसमें सुधार की उम्मीद है.

अभी का रेट क्या है?

अभी, इंटरनेशनल मार्केट COMEX पर Copper का प्राइस लगभग $5.67 प्रति पाउंड तक पहुंच गया है. भारत में, MCX पर इसका प्राइस लगभग Rs. 1154.80 प्रति kg है.

इन्वेस्ट करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि Copper अभी लंबे समय के लिए अच्छा मौका दे रहा है. हालांकि, मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, इसलिए इन्वेस्ट करने से पहले सही जानकारी इकट्ठा करना और सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है.