इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की कोशिशों को उस समय मजबूती मिली, जब अरब राजनीतिक गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने उनके प्रतिद्वंद्वी गादी आइसेनकोट को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। जॉइंट लिस्ट राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने आइसेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नामित करने की सिफारिश करेगी। इस घटनाक्रम से इजरायल में नई सरकार के गठन की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
गादी आइसेनकोट को मिला 67 सांसदों का समर्थन
द टाइम्स ऑफ इजरायल की 4 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट के पास 11 सीटें हैं। वहीं, राआम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास पहले ही आइसेनकोट के समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। राआम के पास 8 सीटें हैं।
आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। जॉइंट लिस्ट और राआम के समर्थन को मिलाकर उनके पक्ष में कुल 67 सीटें हो जाती हैं। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत जरूरी है। इस लिहाज से आइसेनकोट बहुमत के आंकड़े से आगे दिखाई दे रहे हैं।
नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने की रणनीति
जॉइंट लिस्ट के अनुसार, उसके तीनों घटकों ने नेतन्याहू और उनकी सरकार की सत्ता में वापसी रोकने के लिए यह फैसला लिया है। पार्टी का मानना है कि आइसेनकोट को समर्थन देने से नई सरकार बनने की संभावना मजबूत होगी। साथ ही ऐसी यूनिटी गवर्नमेंट बनने का खतरा भी कम होगा, जिसमें नेतन्याहू सत्ता में बने रह सकते हैं।
हमास के निरस्त्रीकरण पर राआम ने दिया समर्थन
द जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, राआम प्रमुख मंसूर अब्बास ने बातचीत के दौरान हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण का समर्थन किया। यह आइसेनकोट की सरकार में शामिल होने के लिए रखी गई चार प्रमुख शर्तों में से एक है। अब्बास ने अरब नागरिकों को आतंकवाद का समर्थक या देशद्रोही बताने के बजाय उन्हें समाज के बीच एक पुल के रूप में देखने की अपील की।
जॉइंट लिस्ट का प्रतिनिधिमंडल जल्द राष्ट्रपति हर्जोग के सामने आइसेनकोट के नाम की औपचारिक सिफारिश करेगा। इसके बाद तय होगा कि इजरायल में नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक दबदबे का अंत होगा या नहीं।
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