दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हंगामे और ACP विवेक भगत (Vivek Bhagat) से जुड़े विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। ACP विवेक भगत ने संसद मार्ग थाने में स्वतंत्र पत्रकार रोजी, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijit Dipke) समेत 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि संबंधित लोगों ने जातिसूचक टिप्पणी की, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया, सरकारी ड्यूटी में बाधा डाली और मानहानि की। जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के बाद SP विवेक भगत की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में 6 लोगों पर अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं। इनमें जातिसूचक टिप्पणी करने, सार्वजनिक अपमान, सरकारी कामकाज में बाधा डालने और मानहानि जैसे आरोप शामिल हैं। इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नाम भी सामने आए हैं।
प्रदर्शन के दौरान जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 3 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान बुटा सिंह गोलचक्कर के पास कथित तौर पर स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रोजी ने विवेक भगत की जाति (मेघ/मेघवाल) का उल्लेख करते हुए उनके एसीपी पद पर नियुक्त होने पर भी सवाल उठाए। इसी घटनाक्रम को लेकर एसीपी ने संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई है। मामले में जातिसूचक टिप्पणी और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने समेत अन्य आरोपों की जांच की जानी है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ACP ने अपनी शिकायत में क्या आरोप लगाए?
एसीपी विवेक भगत की शिकायत के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और उन्हें हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। विवेक भगत का दावा है कि रोजी और उनके साथियों ने बार-बार उनका सामना किया, जिससे सरकारी ड्यूटी के निर्वहन में बाधा उत्पन्न हुई। शिकायत में कहा गया है कि एसीपी ने इन टिप्पणियों को नजरअंदाज किया और अपनी ड्यूटी जारी रखी।
थाने के बाहर प्रदर्शन और सोशल मीडिया पोस्ट का मामला
शिकायत के अनुसार, उसी शाम रोजी और अन्य लोगों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और एसीपी के खिलाफ नारेबाजी की। विवेक भगत ने आरोप लगाया है कि इस दौरान उन्हें कथित तौर पर ‘यौन दरिंदा’ और ‘संभावित बलात्कारी’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। इसके अलावा, शिकायत में रोजी, गजेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ सदस्यों पर एसीपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित पोस्ट और रील सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का आरोप भी लगाया गया है। एसीपी का दावा है कि इन गतिविधियों से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत में किन 6 लोगों के नाम शामिल हैं?
एसीपी विवेक भगत की शिकायत में कुल छह लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें स्वतंत्र पत्रकार रोजी, गजेंद्र सिंह, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के नाम हैं। शिकायत के मुताबिक, एसीपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित पोस्ट और रील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर प्रसारित की गईं। विवेक भगत का आरोप है कि इन गतिविधियों के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा और उनकी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
रोजी की शिकायत की भी जांच जारी
एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि रोजी की ओर से उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर एक अलग शिकायत दर्ज कराई गई थी। उनके मुताबिक, इस शिकायत को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को भेजा गया है, जहां मामले की जांच जारी है। इस तरह जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम से जुड़ा विवाद अब दोनों पक्षों की शिकायतों और पुलिस जांच तक पहुंच गया है। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
किन-किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
एसीपी विवेक भगत की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी कामकाज में बाधा डालने और मानहानि समेत कई आरोपों से संबंधित कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम: कथित जातिसूचक टिप्पणी और अपमान से संबंधित आरोप। भारतीय न्याय संहिता की धारा 221: लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन से रोकने या उसमें बाधा डालने से संबंधित प्रावधान। भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2): मानहानि से संबंधित प्रावधान। भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5): कई व्यक्तियों द्वारा साझा इरादे से किए गए आपराधिक कृत्य में संयुक्त दायित्व से संबंधित प्रावधान। FIR में इन कानूनी प्रावधानों को शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं। मामले में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
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