“This too shall pass…” शांत रहो, धैर्य रखो, यह समय भी बीत जाएगा। एक अकाट्य सत्य है कि ‘समय सब कुछ बदल देता है’। दुर्भाग्य यह है कि हम इस सत्य को हज़ार मर्तबे पढ़ते और दोहराते हैं, लेकिन कठिन परिस्थितियों में इसे अपने जीवन में उतारना भूल जाते हैं। अपने ही आसपास देखिए, कितने लोग परेशान हैं, कितने लोग दुःखी हैं और कितने अपनी समस्याओं में इस कदर उलझे हुए हैं कि उन्हें लगता है अब सब कुछ समाप्त हो गया है और कोई रास्ता नहीं बचा, चारों ओर केवल और केवल अंधकार है। यही वह क्षण है, जब हम सबसे बड़ी भूल कर रहे होते हैं। “Time heals all wounds…” अर्थात् समय हर घाव को भरने की शक्ति रखता है।
“कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः। कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः॥” इस संस्कृत सुभाषित का भावार्थ है समय सभी परिस्थितियों को प्रभावित करता है। समय की गति को कोई रोक नहीं सकता इसलिए परिस्थितियों के बदलने की संभावना पर विश्वास रखना चाहिए। सभी आज की समस्या को स्थायी और आज के दुःख को जीवनभर का सच मान लेते हैं।
एक मानसिक व्यायाम करते हुए एक बार स्वयं से पूछिए कि क्या आज भी आपके पास वही समस्या है जो दस वर्ष पहले थी? क्या पांच वर्ष पहले का दुःख आज भी उसी रूप में आपके समक्ष है? निस्संदेह आपका जवाब ‘ना’ ही होगा। क्या यह भी सच नही जो समस्याएं कभी पहाड़ जैसी लगती थीं आज उसकी स्मृति भी धुंधली पड़ चुकी है। ध्यान से देखिए समय ने परिस्थितियां बदलीं, रास्ते बदले और साथ ही हमें भी बदल दिया है। “Patience is a virtue.” इस अंग्रेज़ी proverb का आशय है धैर्य एक महान गुण है।
“कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः। कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः॥” इस संस्कृत सुभाषित का भावार्थ है समय सभी परिस्थितियों को प्रभावित करता है। समय की गति को कोई रोक नहीं सकता इसलिए परिस्थितियों के बदलने की संभावना पर विश्वास रखना चाहिए। याद रखिए बड़ी से बड़ी समस्या भी जीवन का एक पड़ाव मात्र है और कोई भी पड़ाव जीवन का अंतिम पड़ाव कभी नहीं हो सकता। भगवद्गीता के एक श्लोक “आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत॥” का अर्थ है सुख और दुःख आते-जाते रहते हैं। वे स्थायी नहीं हैं इसलिए मनुष्य को धैर्यपूर्वक उनका सामना करना चाहिए। किसी कठिन क्षण को अपने पूरे जीवन का निष्कर्ष मत बनने दीजिए।
सत्य यह है कि हमारी वर्तमान समस्या से बड़ी समस्या है हमारा अशांत मन, अधीरता और घबराहट। सच्चाई यह है एक अशांत मन कभी समाधान नही खोज सकता। जिस तरह स्थिर पानी में ही प्रतिबिंब साफ दिखाई देता है उसी तरह शांत मन में ही सही रास्ता दिखा सकता है। संस्कृत के एक प्रसिद्ध सुभाषित “समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥” का भावार्थ है जो मनुष्य सुख और दुःख में संतुलित रहता है वह जीवन की कठिनाइयों का सामना अधिक दृढ़ता से कर पाता है। “After a storm comes a calm…” इसे याद रखिए कि तूफान के बाद शांति अवश्य आती है। जीवन के कठोरतम क्षण में सबसे पहले ठहरिए, स्वयं पर विश्वास रखिए और धैर्य के साथ आगे बढ़िए। मन में विश्वास रखिए कि आज का अंधकार कल के उजाले को रोक नहीं सकता।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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