“If it is to be, it is up to me…” का अर्थ होता है अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने का संकल्प। दूसरों के सहारे और सहयोग की प्रतीक्षा के बिना अपने मार्ग में स्वयं अपने सामर्थ्य के अनुरूप पाँव-पाँव चलने वाला ही पहुँचता है सफलता के वांछित शिखर तक। अक्सर हम सोचते हैं कि कोई आएगा जो हमें समझेगा, हमारा दर्द बाँटेगा और हमारी जिंदगी बदल देगा। लेकिन जीवन की कठोर सच्चाई यह है कि लोग कुछ समय के लिए हमारा साथ दे सकते हैं मगर हमारी लड़ाई हमें स्वयं ही लड़नी पड़ेगी।

याद रखिए, आपकी सबसे बड़ी कमजोरी दूसरों की प्रतीक्षा में अपनी शक्ति को भूल जाना है। जब हम अपनी खुशियों के लिए दूसरों की तारीफ, अपने आत्मविश्वास के लिए दूसरों के प्रोत्साहन और अपनी सफलता के लिए दूसरों के सहयोग पर निर्भर हो जाते हैं तब अनजाने में हम अपनी क्षमता सीमित कर लेते हैं। मुण्डकोपनिषद् के श्लोक नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः इसके आधार पर दुर्बल इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति को आत्मबोध प्राप्त नहीं होता। जीवन में आगे बढ़ने के लिए आंतरिक शक्ति और दृढ़ संकल्प आवश्यक हैं।

अकेले होने और अकेलापन महसूस करने में बहुत अंतर है। जहां अकेलापन हमें कमजोर करता है वहीं स्वयं के साथ सहज होना हमें भीतर से मजबूत बनाता है।कहने का आशय यह नहीं है कि हमें रिश्तों, मित्रता या सहयोग से दूर हो जाना चाहिए बल्कि इसका अर्थ है कि हम दूसरों को पूरा सम्मान दें, उनका साथ स्वीकार करें लेकिन अपने दायित्वों का भार स्वयं वहन करें।अँग्रेज़ी की एक प्रसिद्ध कहावत है “Believe you can and you’re halfway there.” इसका अर्थ है यदि आपको विश्वास है कि आप कर सकते हैं तो समझिए आप आधी मंजिल पहले ही तय कर चुके हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥ अर्थात् मनुष्य को स्वयं अपना उत्थान करना चाहिए, स्वयं को नीचे नहीं गिराना चाहिए। मनुष्य स्वयं अपना मित्र भी है और स्वयं अपना शत्रु भी। इसलिए कठिन क्षणों में अश्रु के सागर में उतरने के स्थान पर उस परिस्थिति से कुछ सीखना चाहिए।लोग आपका साथ छोड़ दें मगर खुद का साथ मत छोड़िए। जब सारे रास्ते बंद दिखाई दें तो नए रास्ते बनाने का साहस जुटाइए। “Fall seven times, stand up eight.” इस अँग्रेज़ी proverb का अर्थ है सात बार गिरो तो आठवीं बार उठकर खड़े हो जाओ।

“Self-help is the best help.” आत्मनिर्भरता के इस संदेश के साथ स्मरण रखिए आपका जीवन बदलने के लिए न ही कोई चमत्कार होने जा रहा है और न ही कोई देव प्रकट होने वाले हैं। आपके भीतर उपस्थित संकल्प, परिश्रम और आत्मविश्वास ही आपको वरदान देने वाले आपके देवता हैं।

ये तीन काम आज से ही आरंभ क़रें, पहला किसी भी सहयोग या सहयोगी की प्रतीक्षा करना छोड़ दीजिए, दूसरा, स्वयं पर विश्वास कीजिए और तीसरा अपने लक्ष्य की ओर पहला कदम आज ही बढ़ाइए वो भी नितांत अकेले। अँग्रेज़ी में कहावत है “The journey of a thousand miles begins with a single step.” यानी हजारों मील की यात्रा भी एक छोटे कदम से शुरू होती है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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