“A good name is rather to be chosen than great riches…” समाज और बिरादरी में अच्छा नाम उस दौलत से कहीं मूल्यवान है जिसे कमाया या गंवाया जा सकता है. धन के कमी की भरपाई कठिन परिश्रम से सम्भव है लेकिन प्रतिष्ठा पर लगा दाग किसी तरह भी मिटाना असम्भव होता है. संस्कृत में कहा गया है यशो हि धनमक्षयम्. इसी बात को अंग्रेज़ी में इस तरह से कहा गया है Your reputation is your greatest asset. दोनो का भावार्थ एक ही है कि आपकी प्रतिष्ठा ही आपकी असली संपत्ति है इसलिए अधिक धन की अपेक्षा अच्छा नाम चुनना उचित है.
समाज में अपना नाम खराब होने का भय आखिर क्यों होता है ? इसके मूल में है कि मनुष्य आर्थिक प्राणी होने से अधिक सामाजिक प्राणी है. मानव को धन-संपत्ति के साथ सम्मान, विश्वास और सामाजिक स्वीकार्यता की भी आवश्यकता होती है. समाज का भय व्यक्ति को अराजक होने से काफ़ी हद तक बचाता है उसे उनकी सीमाओं और मर्यादाओं का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करता है. पुराने समय में “हुक्का-पानी बंद” करने का भय भी इसी सामाजिक दबाव का एक रूप था. हालाँकि आज “हुक्का-पानी बंद” का स्वरूप बदल गया है लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा का महत्व अब भी कायम है.
मनुष्य आर्थिक नुकसान सह सकता है, पर अपने सम्मान और विश्वास के खोने की पीड़ा अधिक गहरी होती है.इसी लिए कहा गया है He who loses wealth loses little; he who loses honor loses much. अर्थात् धन खोने वाला थोड़ा खोता है लेकिन सम्मान खोने वाला बहुत कुछ खो देता है.
कुलेन किं तस्य गुणैर्विहीनः पयोनिधेः किं लवणेन पूर्णः.
नीतिशास्त्र से ली गई इस प्रसिद्ध संस्कृत सूक्ति का आशय सीधा और स्पष्ट है कि गुणों के बिना उच्च कुल (वंश) का कोई महत्व नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे खारे पानी से भरे समुद्र का कोई उपयोग नहीं होता. An honest name is better than a full purse. यानी एक ईमानदार नाम एक भरी हुई जेब से बेहतर है. धन विरासत में मिल सकता है लेकिन प्रतिष्ठा आपको ही अर्जित करनी पड़ती है. इसलिए ऐसे कार्यों से यथा सम्भव बच कर रहना चाहिए जिसके किए जाने पर वर्षों का विश्वास एक क्षण में नष्ट हो जाए. दौलत खोकर फिर कमाई जा सकती है लेकिन खोया हुआ सम्मान वापस पाना कहीं अधिक कठिन होता है.
यदि किसी व्यक्ति से गंभीर भूल हुई है तो उसे आत्मचिंतन, आत्ममंथन और आत्मावलोकन का अवसर मिलना चाहिए. सामाजिक बहिष्कार को दंड नही वही अवसर समझना चाहिए. किस भी दंड का उद्देश्य किसी को तोड़ना नहीं बल्कि उसे उसकी गलती का भान करा कर सुधार की राह पर लौटाना होता है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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