आज 19 अक्टूबर का दिन, नवरात्रि की महानवमी, मां दुर्गा की उपासना के अलावा आत्मशक्ति, साधना और जीवन की संपूर्णता को समझने का अवसर भी है। मां दुर्गा के नौवें और अंतिम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना हमें सिखाती है कि सच्ची सिद्धि, अलौकिक शक्तियों की प्राप्ति ही नही बल्कि अपने व्यक्तित्व को ज्ञान, विवेक, करुणा और सदाचार से समृद्ध बनाने में है।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
इस संस्कृत श्लोक का भावार्थ है सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और देवता भी जिनकी सेवा करते हैं वे सिद्धि प्रदान करने वाली देवी सदैव हमारा कल्याण करें। ‘सिद्धि’ का शाब्दिक अर्थ है पूर्णता और ‘दात्री’ का अर्थ है प्रदान करने वाली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कमल पर विराजमान मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को अष्ट सिद्धियां प्रदान करती हैं। मां सिद्धिदात्री का स्वरूप पवित्रता, स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। “Faith can move mountains.” अंग्रेज़ी की इस पंक्ति का अर्थ है अटूट श्रद्धा से बड़ी से बड़ी बाधा को भी पार किया जा सकता है। मां सिद्धिदात्री की उपासना मनुष्य को यह संदेश देती है कि बाहरी सफलता से पहले आंतरिक शुद्धता आवश्यक है।
व्यक्तिगत जीवन में मां सिद्धिदात्री का संदेश है कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास से कठिन लक्ष्य भी आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। सामाजिक जीवन में की जाने वाली कन्या पूजन हमें नारी के सम्मान, बालिकाओं की सुरक्षा और समान अवसरों के महत्व का स्मरण कराती है। कोई भी पूजा तभी सार्थक है जब हम उसे अपने व्यवहार में भी संवेदनशीलता के साथ उतारें।
आध्यात्मिक जीवन में हवन, मंत्र-जप और ध्यान आत्मचिंतन के माध्यम हैं यह सभी प्रक्रिया हमें अपने अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों पर विजय पाने की प्रेरणा देते हैं। “Prayer is the key of the morning and the bolt of the evening.” इस पंक्ति का अर्थ है प्रार्थना दिन की अच्छी शुरुआत की कुंजी और संध्या की सुरक्षा है। महानवमी का वास्तविक संदेश यही है कि भक्ति हमें विनम्र बनाए, ज्ञान हमें विवेक दे और शक्ति हमें परोपकार के लिए प्रेरित करे।
“The fear of the Lord is the beginning of wisdom.” इस पंक्ति का अर्थ है ईश्वर के प्रति श्रद्धा और आदर से ही सच्चे ज्ञान एवं विवेक का मार्ग खुलता है। मां सिद्धिदात्री की कृपा का श्रेष्ठ अनुभव तभी है जब हमारी साधना हमारे आचरण में दिखाई दे। मां सिद्धिदात्री की आराधना हमें याद दिलाती है कि सबसे बड़ी सिद्धि अपने भीतर के अज्ञान पर विजय पाना अपने व्यवहार में विनम्रता और अपने कर्मों से समाज का कल्याण करना है। सच्ची उपासना वही है जो श्रद्धा को संस्कार, ज्ञान को विवेक और शक्ति को सेवा में बदलने का काम करे।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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