जब जीवन का संतुलन बिगड़ता है तो प्रकृति स्वयं हमें सावधान करती है। भूकंप, बाढ़, चक्रवात,तूफान, अतिवृष्टि या अन्य आपदाएं जन-धन को बर्बाद कर सकती हैं। किस भी आपदा से बचाव के लिए शत प्रतिशत प्रशासन पर निर्भर रहना उचित नहीं होता इससे समाज को को बचाए रखना प्रत्येक परिवार और नागरिक का संस्कार होना चाहिए। हर साल 13 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम “Resilience Starts at Home” “लचीलापन घर से शुरू होता है” रखा गया है जो हमें याद दिलाती है कि सुरक्षित समाज की पहली सीढ़ी सुरक्षित और सजग घर है।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो सजगता अपने आप मे एक साधना है। ईश्वर प्रदत्त विवेक और बुद्धि का उपयोग संकट आने के बाद पछताने के लिए नहीं बल्कि ऐसी तैयारी करने के लिए होना चाहिए कि आपात काल का दुष्परिओनाम कम से कम हो।

“Prevention is better than cure.” हमेशा याद रखें
संकट के बाद उपचार से बेहतर है संकट को पहले ही रोकने का प्रयास। घर में आपातकालीन किट रखना, परिवार के साथ सुरक्षित स्थान और निकास मार्ग तय करना, मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेना जैसे आवश्यक सुरक्षा उपाय बड़े संकट में जीवनरक्षक बन सकते हैं। “A stitch in time saves nine.”
इसका अर्थ है समय रहते किया गया छोटा प्रयास बड़े नुकसान से बचा सकता है।

भारत में NDMA, NDRF के अलावा राज्य और जिला स्तर की संस्थाएं आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। NDRF का मुख्य संदेश “आपदा सेवा सदैव सर्वत्र” सेवा, साहस और मानवीय कर्तव्य की भावना को सामने रखता है।

संकट की घड़ी में सबसे बड़ा धर्म होता है स्वयं को सुरक्षित रहना और दूसरों को सुरक्षित करना। स्मरण रहे जब परिवार सजग होता है तब ही समाज और राष्ट्र मज़बूत होता है और देश आपदा के सामने अधिक resilient बनता है। जी हाँ। नेपाल मे आई प्राकृतिक आपदा से बड़ा इसका उदाहरण और क्या होगा? प्रकृति जीवन देती है और जब-जब उसका संतुलन बिगड़ता है वही प्रकृति हमें चेतावनी भी देती है। आपदा ही हमें सिखाती है कि मनुष्य अकेला नहीं है। “United we stand, divided we fall.” अर्थात
संकट के समय सामूहिक एकता ही सबसे बड़ी शक्ति बनती है। संस्कृत मे इसी बात को कहने के लिए एक प्रसिद्ध सुभाषित है संघे शक्तिः कलौ युगे। यानि एकता और सामूहिक सहयोग में ही शक्ति निहित है।

आपदा और संकट में देश की सीमाओं को लांघ कर मानवता सबसे बड़ा धर्म बन जाती है। आपदा से से स्वयं की रक्षा करना जीवन के प्रति हमारी जिम्मेदारी और ईश्वर के प्रति हमारी कृतज्ञता भी है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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