Business Desk- Jio Platforms IPO : अरबपति मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms शेयर बाजार में उतरने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 37,700 करोड़ रुपए का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है। शेयर का प्रस्तावित प्राइस बैंड 1,150 से 1,220 रुपए और वैल्यूएशन करीब 11 लाख करोड़ रुपए बताया गया है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।

कंपनी के DRHP के मुताबिक जियो की ताकत सिर्फ टेलीकॉम नहीं है। उसके पास बड़ा ग्राहक आधार, डिजिटल इकोसिस्टम, मजबूत टेक्नोलॉजी और बढ़ता वित्तीय प्रदर्शन है। वहीं नेटवर्क पर भारी खर्च, प्रतिस्पर्धा, सरकारी नियम, साइबर सुरक्षा और ग्राहक छोड़ने जैसे जोखिम भी हैं।

जियो की सबसे बड़ी ताकत

52.44 करोड़ ग्राहक: 31 मार्च 2026 तक जियो के 52.44 करोड़ ग्राहक थे। 4G-5G ग्राहक आधार दूसरे सबसे बड़े खिलाड़ी से करीब 1.4 गुना था। वित्त वर्ष 2026 में वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60% रही और कंपनी ने 2.7 करोड़ नए एक्टिव मोबाइल ग्राहक जोड़े।

टेलीकॉम से आगे कारोबार: जियो का कारोबार कंटेंट, वित्तीय सेवाओं, क्लाउड और AI तक फैला है। IPL 2026 के दौरान 19.87 करोड़ से ज्यादा दर्शकों ने जियो कनेक्टिविटी से जुड़े JioHotstar पैकेज पर कंटेंट देखा।

टेक्नोलॉजी पर फोकस: कंपनी के डिजिटल प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी विभाग में 11,303 कर्मचारी हैं। जियो और उसकी सहायक कंपनियों ने 4G, 5G, 6G, क्लाउड और AI नेटवर्क ऑटोमेशन से जुड़े 6,817 पेटेंट के लिए आवेदन किया है।

वित्तीय प्रदर्शन: FY26 में ऑपरेशनल रेवेन्यू 1,46,885.3 करोड़ रुपए, EBITDA 76,255.4 करोड़ रुपए और EBITDA मार्जिन 51.91% रहा। FY24-26 में रेवेन्यू CAGR 15.79% और EBITDA CAGR 17.79% रहा। नेट लीवरेज 0.88 गुना से घटकर 0.36 गुना हुआ।

आगे बढ़ने के बड़े मौके

भारत में 31 मार्च 2026 तक 26.35 करोड़ से ज्यादा 2G ग्राहक थे। जियो इन्हें 4G-5G में लाने का मौका देखता है।

होम ब्रॉडबैंड में भी बड़ा अवसर है। जियो के पास 2.71 करोड़ होम ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं और JioFiber-जियोAirFiber के जरिए विस्तार जारी है।

देश में करीब 7.9 करोड़ MSME हैं, लेकिन एंटरप्राइज डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल 3% से भी कम है। जियो कनेक्टिविटी, क्लाउड और CPaaS के जरिए इस बाजार को लक्ष्य कर रहा है।

इसके अलावा कंपनी AI, Smart Home और अपनी तकनीक को विदेशी बाजारों में बेचने के अवसर भी देख रही है। DRHP के अनुसार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 49.6 लाख करोड़ रुपए की है और FY31 तक 125.8 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।

निवेशकों के लिए बड़े जोखिम

जियो को नेटवर्क और नई तकनीक पर लगातार भारी निवेश करना पड़ता है। प्रतिस्पर्धी कंपनियां कम कीमत या डिस्काउंट के जरिए दबाव बढ़ा सकती हैं।

टेलीकॉम लाइसेंस, स्पेक्ट्रम की कीमत और नियमों में बदलाव भी कारोबार प्रभावित कर सकते हैं। डेटा प्राइवेसी, साइबर अटैक और नेटवर्क में तकनीकी खराबी से ग्राहक अनुभव पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा टैरिफ बढ़ने, सिम की संख्या घटने और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के कारण ग्राहक छोड़ने का जोखिम भी है। आर्थिक सुस्ती या बढ़ती महंगाई से ग्राहक डिजिटल सेवाओं पर खर्च घटा सकते हैं।

निवेशक क्या देखें?

Jio Platforms का बड़ा ग्राहक आधार, मजबूत EBITDA, डिजिटल कारोबार और AI-ब्रॉडबैंड जैसे नए अवसर इसे बड़ा IPO बनाते हैं। लेकिन 11 लाख करोड़ रुपए का वैल्यूएशन, प्रतिस्पर्धा, नियामकीय जोखिम और लगातार टेक्नोलॉजी खर्च भी निवेश से पहले देखना जरूरी है।

यानी सिर्फ अंबानी की कंपनी या IPO का बड़ा आकार देखकर फैसला लेने के बजाय प्राइस, वैल्यूएशन, DRHP के जोखिम और अपनी निवेश क्षमता को साथ में देखना जरूरी होगा।