जुलाना : सड़क किनारे बजते ढोल-नगाड़े, मिठाई बांटते खुशहाल चेहरे और फूलों से दुल्हन की तरह सजी एक गाड़ी… पहली नजर में जुलाना के शादीपुर गांव में इस नजारे को जिसने भी देखा, उसे लगा कि शायद गांव में किसी की बारात आ रही है या कोई बड़ी शादी का जश्न है। लेकिन ठहरिए! यह किसी शादी का तामझाम नहीं, बल्कि एक नवजात बेटी के इस दुनिया में कदम रखने का ऐतिहासिक स्वागत था।

अस्पताल से जब नन्हीं परी ‘सानवी’ पहली बार अपने घर के लिए रवाना हुई, तो उसका स्वागत किसी राजकुमारी की तरह किया गया। इस अनोखे और दिल छू लेने वाले जश्न को देखकर राहगीर भी रुक गए और सच जानने के बाद हर किसी के मुंह से बस एक ही शब्द निकला—’वाह!’

45 साल के सूखे के बाद बरसी ‘ममता की मखमली फुहार’

शादीपुर गांव के रहने वाले विकास और उनकी पत्नी सिमरन के घर शादी के करीब एक साल बाद किलकारी गूंजी है। लेकिन इस जश्न की असली वजह वक्त के एक लंबे अंतराल में छिपी है। विकास के परिवार में आखिरी बार किसी बेटी (उनकी बुआ) का जन्म करीब 45 साल पहले हुआ था। साढ़े चार दशकों के इस लंबे इंतजार के बाद जब घर में बेटी सानवी ने जन्म लिया, तो पूरे कुनबे की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिजनों ने अस्पताल में ही तय कर लिया था कि घर की इस नई ‘लक्ष्मी’ का स्वागत ऐसा होगा जिसे पूरा इलाका याद रखेगा।

‘फर्क बेटा-बेटी में नहीं, लोगों की सोच में है’

आज के आधुनिक दौर में भी जहां कई जगहों पर बेटियों के जन्म को लेकर पुरानी मानसिकता हावी है, वहीं विकास के किसान परिवार ने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है।

भावुक और गर्व से भरे लहजे में विकास और सिमरन कहते हैं, “आज की बेटियां किसी भी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं। शिक्षा से लेकर सेना, खेल और प्रशासन तक, हर जगह बेटियां देश का परचम लहरा रही हैं। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि हम उन्हें बिना किसी भेदभाव के समान अवसर और अच्छी परवरिश दें। बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं होता, सारा फर्क बस इंसान की मानसिकता का है।”

समाज को दिया सकारात्मक सोच का संदेश

फूलों से लदी गाड़ी में जब नन्हीं सानवी गांव की चौखट पर पहुंची, तो ढोल की थाप पर पूरा परिवार झूम उठा। मिठाइयां बांटी गईं और रिश्तेदारों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। इस जश्न के जरिए परिवार ने न सिर्फ अपनी खुशी जाहिर की, बल्कि समाज को यह कड़ा और सकारात्मक संदेश भी दिया कि बेटियों का आना चिंता का नहीं, बल्कि सौभाग्य और उत्सव का सबसे बड़ा अवसर है।