कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में बर्रा-7 चौराहे पर 67.5 मीटर लंबे ओपन वेब ट्रस गर्डर की असेंबली शुरू हो गई है. इसे पुल-पुश तकनीक से स्थापित किया जाएगा और काम आगामी कुछ हफ्तों में पूरा होने की संभावना है.
कानपुर. मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-2 में बर्रा-7 चौराहे पर 67.50 मीटर लंबे विशेष स्टील गर्डर को स्थापित करने का काम शुरू हो गया है. उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) यहां ओपन वेब ट्रस गर्डर लगा रहा है, जो कानपुर मेट्रो के दोनों कॉरिडोरों में अब तक इस्तेमाल होने वाला सबसे लंबा स्टील स्पैन होगा. इसे जमीन से करीब 13.7 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा.
तीन स्तरों पर यातायात
बर्रा-7 चौराहे पर निर्माण कार्य के दौरान इंजीनियरों के सामने यातायात और संरचना से जुड़ी चुनौती है. यहां सबसे नीचे सड़क है, उसके ऊपर बर्रा-7 और बर्रा-8 बाईपास का फ्लाईओवर है. अब इनके ऊपर से मेट्रो का वायाडक्ट गुजरेगा.

बिना बीच में कोई पिलर बनाए इतनी लंबी स्टील संरचना को स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है. इसके लिए मौके पर अस्थायी स्टील सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार किया गया है, जिस पर गर्डर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर असेंबल किया जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में यातायात को कम से कम प्रभावित रखने का प्रयास किया जा रहा है.
क्यों पड़ा विशेष गर्डर?
कानपुर मेट्रो में सामान्य तौर पर करीब 27 मीटर लंबे प्री-कास्ट कंक्रीट यू-गर्डर लगाए जाते हैं. हालांकि, बड़े चौराहों, फ्लाईओवर और रेलवे ट्रैक जैसी बाधाओं वाले स्थानों पर बीच में पिलर बनाना संभव नहीं होता. ऐसे स्थानों पर लंबी दूरी को कवर करने के लिए विशेष स्टील संरचनाओं का इस्तेमाल किया जाता है.
ओपन वेब ट्रस गर्डर स्टील से बनी धनुषाकार जालीदार संरचना है. इसका डिजाइन भारी भार संभालने और बिना अतिरिक्त पिलर के लंबे स्पैन को सहारा देने के लिए तैयार किया जाता है.
पुराने रिकॉर्ड से लंबा स्पैन
इससे पहले कॉरिडोर-1 में रावतपुर तिराहा, सीसामऊ नाला और नौबस्ता फ्लाईओवर पर 45-45 मीटर लंबे स्टील बॉक्स गर्डर लगाए गए थे. बर्रा-7 में प्रस्तावित 67.50 मीटर का गर्डर इनसे 22.50 मीटर अधिक लंबा है.

आने वाले समय में कॉरिडोर-2 के तहत इसी तरह के दो और गर्डर भी लगाए जाएंगे.
पुल-पुश तकनीक से स्थापना
फिलहाल गर्डर के हिस्सों को जोड़ने और असेंबल करने का काम जारी है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वीकृत तकनीकों के अनुसार पुल-पुश विधि से गर्डर को खिसकाकर निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जाएगा. इसके बाद इसे दोनों ओर के मेट्रो ट्रैक से जोड़ा जाएगा.
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि व्यस्त चौराहे के ऊपर यह काम सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन करते हुए किया जा रहा है. उनका कहना है कि इस दौरान आम लोगों और यातायात को कम से कम असुविधा हो, इसका ध्यान रखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि आगामी कुछ हफ्तों में यह काम पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद कॉरिडोर-2 के निर्माण कार्य को और गति मिलेगी.

