सुमन चौहान, करनाल: करनाल के उपायुक्त ने जिले के किसानों से पराली न जलाने और सरकार द्वारा दिए गए विकल्पों का इस्तेमाल करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने से प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा होती है, जिससे सभी को परेशानी उठानी पड़ती है। प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए 700 से 800 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है, जो खेतों में पैनी नजर रखेंगे। उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार रेड एंट्री, जुर्माना और मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
700 से 800 अधिकारी करेंगे निगरानी, ड्रोन से भी रखी जाएगी नजर
प्रशासन ने खेतों में पराली जलाने पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए व्यापक तैयारी की है। उपायुक्त ने बताया कि तैनात किए गए अधिकारी दिन के साथ-साथ रात में सामने आने वाले मामलों पर भी कड़ी नजर रखेंगे। इसके अलावा संदिग्ध और संवेदनशील इलाकों में निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जाएगी। जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों को पहले ही पराली प्रबंधन के तरीकों और इसे जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी जा चुकी है।
पराली न जलाने पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि, जलाने पर 3 कड़े प्रावधान
उपायुक्त ने किसानों को सुझाव दिया है कि वे पराली को जलाने के बजाय खेत में ही दबा दें या अन्य सरकारी विकल्पों का उपयोग करें। जो किसान पराली नहीं जलाएंगे और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को अपनाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं, पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ तीन तरह के सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनमें कृषि रिकॉर्ड में रेड एंट्री करना, आर्थिक जुर्माना लगाना और पुलिस में मामला दर्ज करना शामिल है।
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