कर्नाटक में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने प्रमुख तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सप्लाई करने का आरोप लगाया है। सरकार के मुताबिक, अलग-अलग जिलों से लिए गए पेट्रोल के सैंपल की लैब जांच में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है, जबकि देश में निर्धारित मानक E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का है। इस मामले में राज्य सरकार ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पेट्रोल सैंपल की जांच में क्या आया सामने?

पीटीआई के मुताबिक, कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री रिजवान अरशद ने बताया कि बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुरा, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए गए थे। इनकी जांच बेंगलुरु स्थित श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट में कराई गई, जिसे NABL की मान्यता प्राप्त है।

जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार:

  • इंडियन ऑयल (IOCL): 31.2% इथेनॉल
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL): 30.5%
  • HPCL का एक अन्य नमूना: 27%
  • BPCL स्पीड: 26.5%
  • नायरा: 26.1%
  • शेल पेट्रोल: 25.5%

सरकार का दावा है कि कुछ नमूनों में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से काफी अधिक पाई गई।

तेल कंपनियों की पारदर्शिता पर उठे सवाल

कर्नाटक सरकार ने IOCL और BPCL की आंतरिक लैब रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ रिपोर्ट में इथेनॉल मिश्रण की मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि यह ईंधन की गुणवत्ता जांचने का महत्वपूर्ण पैमाना है।

ज्यादा इथेनॉल से वाहनों को नुकसान का खतरा?

राज्य सरकार के अनुसार, E20 से अधिक इथेनॉल मिश्रण से वाहनों का माइलेज घट सकता है। इसके अलावा फ्यूल पंप, इंजेक्टर, फिल्टर, होज और सील जैसे पुर्जों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

सरकार ने तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई, प्रभावित वाहन मालिकों को मुआवजा, पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल मिश्रण की अनिवार्य जानकारी और अलग-अलग ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही, वाहनों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए विशेष फंड बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। अब इस विवाद में तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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