अथ श्री कलयुगी रामकृष्ण कथा : चुनाव से पहले उगता सूरज,चुनाव के बाद…..!

रायपुर. चुनाव कई लोगों को बना देता है तो कई लोगों की लुटिया डूबो देता है. ऐसे ही कवर्धा जिला पंचायत सदस्य रामकृष्ण साहू हैं. उन्होंने कवर्धा में  चुनाव लड़ा तो उनका निशान था उगता सूरज. लेकिन चुनाव के दौरान एक फैसले ने उनकी किस्मत का ही सूरज डूबा दिया. आखिरकार उन्हें भाजपा की शरण लेनी पड़ी.

दिलचस्प है कि कवर्धा में रामकृष्ण वही शख्स हैं जो नगरीय निकाय चुनाव तक जिलाध्यक्ष थे. लेकिन टिकट में बी फॉर्म किसी और को देने की वजह से उन्हें साइड कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने जिला पंचायत चुनाव में खुद किस्मत आजमाया. चुनाव वे जीत गए.

चुनाव प्रचार में जो उनके पोस्टर छपे, उसमें वनमंत्री मोहम्मद अकबर की फोटो थी. वे उगता सूरज छाप पर वोट मांग रहे थे. चुनाव के बाद उनकी एक और तस्वीर आई है. जिसमें वे डॉक्टर रमन सिंह के पैर पकड़कर भाजपा की सदस्यता ले रहे हैं. सत्ता न सही विपक्ष ही सही.

रामकृष्ण साहू का खेल कवर्धा में जिला पंचायत सदस्य चुने जाने के बाद से शुरु हुआ.

उपाध्यक्ष का चुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए नाक का सवाल था. रामकृष्ण का संपर्क दो दिन पहले से पार्टी के लोगों का संपर्क टूट गया. उनके घर जाकर किसी कार्यकर्ता ने जानकारी ली तो उन्हें घरवालों ने बताया कि कि रामकृष्ण की तबियत बहुत खराब है. उन्हें बॉटल चढ़ रही है.

जब वो कार्यकर्ता घर के अंदर गया तो न रामकृष्ण थे न ही बॉटल. कार्यकर्ता को लगा कि शायद बॉटल खत्म हो गया होगा इसलिए रामकृष्ण चढ़ाने के लिए दूसरी बॉटल लेने गए होंगे. ये सोचकर कार्यकर्ता वापिस लौट आए. उसके बाद उन्हें कांग्रेसियों ने कई बार फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन रामकृष्ण का फोन नहीं लगा.

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