प्रदीप गुप्ता, कवर्धा। जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य गांव नंदनी कुमान में पिछले कुछ महीनों के दौरान पांच बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। बच्चों की मौत किन कारणों से हुई, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है। ग्रामीण किसी अज्ञात बीमारी की आशंका जता रहे हैं। लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीमें गांव में पहुंचकर बच्चों की जांच और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटा रही हैं।

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में शिविर लगाकर बच्चों की जांच की। इस दौरान करीब 16 बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में बच्चों का इलाज किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर बच्चों की सेहत की जानकारी ले रही हैं, ताकि किसी भी बच्चे की स्थिति बिगड़ने पर समय रहते मदद दी जा सके।
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम भी गांव पहुंची

बच्चों की मौत के मामले को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी गांव में सर्वे शुरू किया है। विभाग के अधिकारी आनंद तिवारी अपनी टीम के साथ नंदनी कुमान पहुंचे और घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और परिवारों से जुड़ी जानकारी ली। इस सर्वे के जरिए गांव के बच्चों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
मृत बच्चों की उम्र को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक, उनकी उम्र करीब डेढ़ से दो साल और पांच से सात साल के बीच बताई जा रही है। हालांकि, बच्चों की मौत बीमारी, संक्रमण, कुपोषण या किसी अन्य वजह से हुई है, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। मौतों के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

एक ही गांव में कुछ महीनों के भीतर पांच बच्चों की मौत और कई अन्य बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने की स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता महेश चंद्रवंशी ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं, आदिवासी नेता कामू बैगा ने शासन-प्रशासन से जवाबदेही तय करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में लगातार शिविर लगाकर बच्चों की जांच कर रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, गांव में जागरूकता की कमी भी एक चिंता का विषय है। हालांकि, बच्चों की मौत को केवल जागरूकता की कमी से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए मौतों के कारणों, बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अब तक मिली चिकित्सकीय जानकारी की जांच जरूरी है।
जांच के बाद ही साफ होगी मौतों की वजह
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें गांव में सक्रिय हैं। एक ओर बच्चों की जांच और इलाज पर ध्यान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घर-घर सर्वे कर परिवारों से जानकारी जुटाई जा रही है।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि नंदनी कुमान में पांच बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या समय रहते उनकी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की पहचान की जा सकती थी। मौतों की वजह स्पष्ट होने के साथ ही यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि गांव में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण और जागरूकता के लिए पहले क्या कदम उठाए गए थे। फिलहाल, जांच पूरी होने और स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
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