केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की सनातन धर्म और संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की. वहीं, अखिलेश ने भाजपा सरकार पर महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने तथा कथावाचकों के बयानों से सामाजिक वैमनस्य फैलने का आरोप लगाया.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच सनातन धर्म, संतों के बयानों और महंगाई को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है. शुक्रवार को केशव मौर्य ने अखिलेश यादव पर संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर की गई टिप्पणी के लिए निशाना साधा और उनसे माफी मांगने की मांग की. दूसरी ओर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने के आरोप लगाए.

केशव मौर्य ने साधा निशाना

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को सनातन धर्म और संत समाज की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. बागेश्वर धाम के संत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातनी परिवार से आते हैं और उन्होंने अपनी भावनाओं के अनुरूप जो बात कही है, उसका संत समाज ने भी समर्थन किया है. मौर्य के मुताबिक, ब्रज क्षेत्र में भी उनके बयान को लेकर कोई परेशानी नहीं है, बल्कि इस पर आपत्ति केवल अखिलेश यादव को है.

शुक्रवार को जारी बयान में मौर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर टिप्पणी करने से पहले अखिलेश यादव को अपने राजनीतिक आचरण पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी संत के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार संत समाज और आचार्यों को है, न कि राजनीतिक दलों को. उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार के प्रति अखिलेश की टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए उनसे क्षमा मांगने की मांग की.

मथुरा आंदोलन पर दी चुनौती

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अगर अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण और उनकी जन्मभूमि की चिंता है तो उन्हें मंदिर परिसर में बनी ईदगाह हटाने के आंदोलन में शामिल होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह अखिलेश के साथ खड़े होने को तैयार हैं, लेकिन मुस्लिम वोट बैंक की चिंता के कारण सपा अध्यक्ष ऐसा नहीं करेंगे.

मौर्य ने सपा की राजनीति को तुष्टीकरण पर आधारित बताते हुए राम मंदिर के भूमि पूजन और प्राण प्रतिष्ठा के दौरान पार्टी नेतृत्व के रवैये का भी उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि सनातन संस्कृति को कमजोर करने की विपक्ष की कोशिशें सफल नहीं होंगी.

महंगाई पर अखिलेश का हमला

वहीं, सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों और मुनाफाखोरी के चलते महंगाई लगातार बढ़ रही है और खाद्य पदार्थों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. उनके मुताबिक, भाजपा सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में नाकाम रही है.

अखिलेश ने कहा कि सरकारी विभागों के आंकड़े भी महंगाई के बढ़ते स्तर की ओर इशारा कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई के जरिए जनता से होने वाली वसूली का हिस्सा भाजपा को चंदे के रूप में मिलता है. त्योहारों के दौरान यह स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे लोगों की खुशियां प्रभावित होती हैं.

उन्होंने डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि आम जनता पहले से ही महंगाई का बोझ उठा रही है. अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा सरकार के सत्ता में रहने तक महंगाई और जनता की परेशानी बढ़ती रहेगी. उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी से परेशान लोगों ने भाजपा को सत्ता से हटाने का फैसला कर लिया है.

कथावाचकों को लेकर भी बयान

अखिलेश यादव ने आयोजकों और प्रायोजकों से अपील की कि वे ऐसे कथाकारों को अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करने से बचें, जिनके बयान समाज में वैमनस्य पैदा करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कथावाचकों के लिए धर्म और प्रवचन से अधिक महत्व धन का है. ऐसे लोगों को मंच देने से आयोजकों को राजनीतिक लाभ के बजाय नुकसान उठाना पड़ सकता है.

अपने बयान में अखिलेश ने शासन-प्रशासन के साथ कार्यक्रम आयोजित कराने वाले लोगों से भी ऐसे कथाकारों से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कथावाचक की तरह दिखाई देते हैं, लेकिन कथा और प्रवचन को व्यवसाय के रूप में इस्तेमाल करते हैं. उनके मुताबिक, ऐसे लोग अपनी भौतिक उपलब्धियों का प्रदर्शन करते हैं और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए अनर्गल बयान देते हैं.

सपा अध्यक्ष ने आयोजकों और प्रायोजकों को आगाह किया कि विवादित बयान देने वाले कथाकार राजनीतिक संरक्षण के चलते बच सकते हैं, लेकिन कार्यक्रम आयोजित कराने वाले लोगों को उसी शहर में जनता के बीच रहना पड़ता है. उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से पैदा होने वाले सामाजिक तनाव का सामना स्थानीय आयोजकों को करना पड़ सकता है. अखिलेश के अनुसार, आस्थावान लोग कथाकारों के विवादित बयानों को आयोजकों और प्रायोजकों की सहमति से भी जोड़कर देख सकते हैं.