पटना। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मुद्दा फिल्मों के टाइटल और उनमें जाति विशेष के इस्तेमाल को लेकर है। हाल ही में फिल्म घूसखोर पंडत के नाम पर हुए विवाद और उसके बाद हुए बदलाव को आधार बनाते हुए खेसारी ने यादव जी की लव स्टोरी पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

खेसारी का वार: सही-गलत का पैमाना एक हो
खेसारी लाल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए इंडस्ट्री के दोहरे रवैये पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि फिल्म जगत एकजुट होकर घूसखोर पंडत का नाम बदलवा सकता है, तो यादव जी की लव स्टोरी के मामले में वैसी ही सक्रियता और एकजुटता क्यों नहीं दिख रही? उनके अनुसार, विरोध और समर्थन का मापदंड हर वर्ग के लिए समान होना चाहिए, तभी इसे निष्पक्ष माना जाएगा।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
खेसारी के इस स्टैंड ने इंटरनेट यूजर्स को दो गुटों में बांट दिया है। जहां सौरभ यादव जैसे प्रशंसकों ने इसे समाज के सम्मान की लड़ाई बताते हुए खेसारी की प्रशंसा की, वहीं कुछ यूजर्स ने इसे अनावश्यक विवाद करार दिया। विरोधियों का तर्क है कि कलाकार को जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए, जबकि समर्थकों का मानना है कि खेसारी ने चुप्पी तोड़कर अपने समाज का दिल जीत लिया है।

क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ घूसखोर पंडत फिल्म है, जिसके टाइटल को लेकर एक वर्ग ने कड़ी आपत्ति जताई थी। मामला कोर्ट तक पहुंचा और अंततः टाइटल बदलना पड़ा। अब यादव जी की लव स्टोरी (जिसमें यूट्यूबर मृदुल तिवारी की बहन प्रगति तिवारी मुख्य भूमिका में हैं) को लेकर खेसारी ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि किसी एक वर्ग के लिए विरोध और दूसरे के लिए चुप्पी फिल्म इंडस्ट्री के दोहरे चरित्र को दर्शाती है।
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