खरखौदा (सोनीपत)। रंगों और कल्पनाओं के जरिए जब भारतीय संस्कृति की झलक कैनवास पर उतरी तो पूरा विद्यालय लोक कलाओं के रंग में रंग गया। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय किढौली पहलादपुर में गुरुवार को आयोजित कला प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। छात्राओं ने देश की अलग-अलग लोक कला शैलियों को अपनी कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।

प्रदर्शनी में डाइट बीसवांमिल की प्रिंसिपल सुजाता खत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने विद्यार्थियों की बनाई कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना की।

मधुबनी से पिचवाई तक, कलाकृतियों में दिखी कला की विविधता

प्रदर्शनी में विप्पन कला, मंडाला कला, वरली कला, मधुबनी कला और पिचवाई कला विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। विद्यार्थियों ने इन पारंपरिक कला शैलियों के जरिए भारतीय संस्कृति, लोक जीवन, परंपराओं और कलात्मक विरासत को खूबसूरती से उकेरा।

कलाकृतियों में विद्यार्थियों की मेहनत के साथ उनकी कल्पनाशीलता भी नजर आई। उपस्थित अतिथियों ने कला अध्यापक देवेंद्र और विद्यार्थियों की रचनात्मकता की प्रशंसा की।

लोक कलाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान : सुजाता खत्री

मुख्य अतिथि सुजाता खत्री ने कहा कि लोक कलाएं भारत की पहचान हैं। इनमें देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पुरानी परंपराओं की झलक मिलती है। विद्यार्थियों को ऐसी गतिविधियों में भाग लेने से अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने और उसे निखारने का अवसर मिलता है।

उन्होंने विद्यालय की इस पहल को सराहनीय बताते हुए विद्यार्थियों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रिंसिपल सत्यबीर राणा, प्रिंसिपल गोविंद, पूर्व प्रिंसिपल राजपाल, पूर्व प्रिंसिपल रमाकांत और पूर्व बीआरसी सुदेश कौशिक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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