विकास कुमार, सहरसा। बिहार की राजनीति में कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इन दिनों काफी दिलचस्प होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक डॉ. संजीव कुमार पोद्दार ने इस क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। सहरसा के देव पैलेस में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए आगामी 29 सितंबर को नामांकन पत्र दाखिल करने की पूरी तैयारी की जानकारी दी।

शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

​छात्र राजनीति के लंबे अनुभव का हवाला देते हुए डॉ. पोद्दार ने कहा कि वे छात्र जीवन से ही जनहित और युवाओं के मुद्दों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि आखिर बिहार को शिक्षा के हब के रूप में कोटा जैसी पहचान कब मिलेगी। आज भी राज्य के मेधावी छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को विवश हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुने जाने वाले विधान पार्षद (MLC) की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह इन गंभीर मुद्दों को सदन के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाए।

​विभिन्न वर्गों की समस्याओं और अधिकारों के लिए हुंकार

​डॉ. पोद्दार ने केवल छात्रों तक सीमित न रहकर समाज के कई अन्य उपेक्षित वर्गों की आवाज भी बुलंद की है। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है:

  • ​वित्तरहित शिक्षक व अनुकंपा आश्रित: वित्तरहित शिक्षकों की दयनीय आर्थिक स्थिति और अनुकंपा आश्रितों की नियुक्तियों में हो रही भारी देरी पर चिंता जताई।
  • ​अधिवक्ता और कर्मी: अधिवक्ताओं के बैठने के लिए चैंबर की स्थिति सुधारने, आशा कार्यकर्ताओं व आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी तथा रात्रि प्रहरियों के लिए उचित वेतन सुनिश्चित करने की मांग की।
  • ​शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता: बिहार विधान परिषद चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट तय करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि चूंकि यह पढ़े-लिखे मतदाताओं का क्षेत्र है, इसलिए प्रतिनिधियों को हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब देना होगा।

​डॉक्टरों की हड़ताल पर हस्तक्षेप

​ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में डॉ. पोद्दार ने प्रत्येक पंचायत स्तर पर एंबुलेंस सेवा शुरू करने तथा विषैले जीवों (सांप-बिच्छू) के काटने पर तुरंत काम आने वाली जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता अनिवार्य करने की मांग की। इसके अलावा, सहरसा में एक पत्रकार और डॉक्टर के विवाद के बाद हुए तबादलों के विरोध में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल पर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि इस गतिरोध से आम जनता की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर जनहित में उचित समाधान निकालना चाहिए।

​अंत में, डॉ. पोद्दार ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति का उद्देश्य मात्र पद पाना नहीं है। उन्होंने कहा कि वे जीत का माला पहनने के बजाय जनता की समस्याओं का माला पहनेंगे और जरूरत पड़ी तो हक की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे अपने जनप्रतिनिधियों से विकास और समस्याओं के समाधान पर सीधे सवाल करें।