Kota maternal death case: राजस्थान के कोटा स्थित मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में 40 वर्षीय प्रसूता रेशमा की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।

उन्होंने महावीर नगर थाने में लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला की हालत पहले से जटिल थी और परिजनों के अपनी जिम्मेदारी पर अस्पताल से छुट्टी कराने के बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई।
13 अक्टूबर को भर्ती हुई थीं रेशमा
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा के मुताबिक, रेशमा को 13 अक्टूबर को गर्भावस्था के 36 सप्ताह 3 दिन पूरे होने पर पेट दर्द की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था। 14 अक्टूबर की सुबह पुराने सिजेरियन ऑपरेशन के टांकों में तेज दर्द और संवेदनशीलता को देखते हुए डॉक्टरों ने आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन किया। सुबह 8:41 बजे रेशमा ने एक बच्चे को जन्म दिया। यह उनकी चौथी डिलीवरी थी। इससे पहले भी उनके तीनों प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुए थे।
प्रसव के बाद अचानक बिगड़ने लगी तबीयत
डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रसव के तुरंत बाद रेशमा को हल्का रक्तस्राव हुआ। इसके बाद उनका ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सेचुरेशन तेजी से गिरने लगा। दिल की धड़कन भी धीमी हो गई। डॉक्टरों को नस में खून का थक्का जमने की आशंका हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दवाइयों से उनका ब्लड प्रेशर स्थिर किया गया। हालांकि, पेशाब की मात्रा कम होने के कारण नेफ्रोलॉजिस्ट और एनेस्थीसिया टीम को भी उपचार में शामिल किया गया।
अस्पताल से छुट्टी के बाद फिर बिगड़ी हालत
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, 15 अक्टूबर को परिजन रेशमा को अपनी जिम्मेदारी पर छुट्टी दिलाकर निजी अस्पताल ले गए थे। चिकित्सा जगत में इसे लामा (LAMA) कहा जाता है, यानी चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध या निर्धारित उपचार पूरा होने से पहले अस्पताल छोड़ना। इसके बाद 16 अक्टूबर को तबीयत बिगड़ने पर रेशमा को दोबारा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। इसी दौरान भर्ती हुई एक अन्य प्रसूता अनीता का उपचार जारी है।
परिजनों ने इंजेक्शन के बाद तबीयत बिगड़ने का लगाया आरोप
रेशमा के भांजे फिरोज ने आरोप लगाया कि प्रसव के बाद जनरल वार्ड में इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। फिरोज का कहना है कि अस्पताल के स्टाफ ने परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया। दूसरे डॉक्टर को दिखाने के लिए मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन उन्हें रिपोर्ट नहीं दी गई।
परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए महावीर नगर थाने में शिकायत दी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वाले स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने और परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा रेशमा की बड़ी बेटी को संविदा पर सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है। फिलहाल, पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है और शव को मोर्चरी में रखवाया गया है।
मां की मौत के बाद चार बच्चों के सामने मुश्किलें
रेशमा के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके भांजे फिरोज के मुताबिक, रेशमा के पति मकसूद खान ड्राइवर हैं और परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से चलता है। रेशमा की तीन बेटियां हैं, जिनकी उम्र 19, 17 और 13 साल है। चौथा बच्चा नवजात है। मां की मौत के बाद अब इन चारों बच्चों के सामने मुश्किल हालात खड़े हो गए हैं। फिलहाल, इस मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन की दलीलें अलग-अलग हैं। इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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