Kota Mothers Kidney Failure Case: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल होने के मामले को लेकर राजस्थान की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने कहा कि ऑपरेशन के बाद किडनी फेल होने वाली पांच प्रसूताएं अब भी डायलिसिस पर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निःशुल्क इलाज और किडनी ट्रांसप्लांट के वादे के बावजूद इलाज की आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। वहीं, जांच के बाद तीन डॉक्टरों की बहाली पर भी उन्होंने सवाल उठाया है।

डॉक्टर बहाल, लेकिन जांच रिपोर्ट पर सवाल
गहलोत ने कहा कि मामले में निलंबित तीन डॉक्टरों को जांच के बाद क्लीन चिट देकर बहाल कर दिया गया। उनका सवाल है कि अगर किसी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं थी, तो पांच महिलाओं की मौत और कई प्रसूताओं की किडनी फेल होने के लिए जिम्मेदारी किसकी है?
मामले की जांच के लिए कई समितियां बनाई गई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक जांच समितियों ने डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही का आधार नहीं पाया, जिसके बाद तीन डॉक्टरों को बहाल किया गया। दूसरी ओर, मृतक और पीड़ित परिवार जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
गहलोत ने दावा किया कि प्रसूताएं अभी भी डायलिसिस के सहारे हैं और उनके परिजनों को आगे के इलाज को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने सरकार से ट्रांसप्लांट, मुआवजा और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
कैडेवर सूची में पंजीकरण को लेकर भी सवाल
गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रसूताओं को निःशुल्क इलाज और ट्रांसप्लांट का भरोसा दिया गया था, लेकिन कैडेवर सूची में उनका पंजीकरण करीब दो महीने बाद 15 सितंबर को हुआ।
उनका सवाल है कि जब पीड़ित महिलाओं को आगे के इलाज और ट्रांसप्लांट की जरूरत थी, तो इस प्रक्रिया में इतना समय क्यों लगा। गहलोत ने सरकार से इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
RGHS के 52 लाख लाभार्थियों का मुद्दा भी उठाया
गहलोत ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय RGHS की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिवारों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च न करना पड़े।
उनका आरोप है कि अब 52 लाख लाभार्थी भुगतान अटकने के कारण परेशानी झेल रहे हैं। गहलोत के मुताबिक कई निजी अस्पताल योजना से पीछे हट रहे हैं और कुछ जगह कैशलेस इलाज के नाम पर मरीजों से एक लाख रुपए से अधिक नकद लेने की शिकायतें सामने आई हैं।
RGHS की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है।
पेंशनर्स को लेकर गहलोत ने सरकार को घेरा
गहलोत ने कहा कि RGHS में परेशानी का सबसे ज्यादा असर पेंशनर्स पर पड़ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ उन्हें नियमित दवाओं और इलाज की जरूरत होती है। ऐसे में भुगतान की समस्या और अस्पतालों में इलाज को लेकर परेशानी उनके लिए बड़ी दिक्कत बन रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई सरकारी कर्मचारी नौकरी में परेशानी के डर से शिकायत दर्ज कराने से बच रहे हैं। गहलोत ने सरकार से RGHS भुगतान का संकट जल्द दूर करने की मांग की।
गहलोत ने कहा कि राइट टू हेल्थ, चिरंजीवी और निःशुल्क दवा एवं जांच जैसी योजनाओं की तरह RGHS का उद्देश्य भी लोगों को इलाज उपलब्ध कराना था। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बुजुर्गों और आम लोगों की इलाज संबंधी परेशानी दूर करने की अपील की।
पढ़ें ये खबरें
- ‘रामायण’ में हनुमान चालीसा गाने पर क्या बोले Diljit Dosanjh? अपनी गलती के लिए मांगी माफी
- 8 नवंबर को रायपुर में मांस-मटन की बिक्री पर प्रतिबंध, होटल में भी बेचने पर होगी कार्रवाई, आदेश जारी
- Ramayana Worldwide Collection: धनतेरस पर ‘रामायण’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, पहले दिन 155 करोड़ का किया कलेक्शन
- Ranveer Singh की ‘प्रलय’ की शूटिंग से टले क्रिकेट मैच, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
- Shehzad Poonawalla बने ‘Rise And Fall 2’ के विनर, जीत की रकम बाढ़ पीड़ितों को किया दान

