कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र के साहाबाद में धान की सरकारी खरीद तुरंत शुरू कराने की मांग को लेकर 22 सितंबर को किसानों और पुलिस के बीच तीखा बवाल हो गया। जीटी रोड जाम करने जा रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर वाटर कैनन चलाई और आंसू गैस के गोले दागे। करीब आधे घंटे चले इस हंगामे और धक्का-मुक्की में भाकियू (चढ़ूनी) अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की पगड़ी उतर गई और पुलिस के एएसआई विजय की आंख में चोट लग गई। इस पुलिसिया कार्रवाई से गुस्साए किसान साहाबाद-बराड़ा स्टेट हाईवे पर शहीद उधम सिंह स्मारक के पास अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।

किसानों के इस उग्र विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण धान की सरकारी खरीद समय पर शुरू न होना है। 16 सितंबर को हुई बैठक में किसानों ने प्रशासन को 20 सितंबर तक खरीद शुरू करने का अल्टीमेटम देते हुए 22 सितंबर को जाम लगाने की चेतावनी दी थी। मंगलवार दोपहर उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के साथ किसान प्रतिनिधियों की बैठक बेनतीजा रही। प्रशासन द्वारा 25-26 सितंबर से खरीद शुरू करने के प्रस्ताव को किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने खारिज कर दिया और किसानों ने एक बजे जीटी रोड की तरफ कूच कर दिया।
चढ़ा सियासी और प्रशासनिक पारा, 23 सितंबर को बुलाई गई महापंचायत
प्रशासनिक स्तर पर गतिरोध तोड़ने की कोशिशें जारी हैं। कुरुक्षेत्र के उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को खरीद की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा है और 21 सितंबर को एमएसपी रिलैक्सेशन व अन्य सुझावों के जवाब भी भेज दिए गए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र से एक-दो दिन में मंजूरी मिलते ही खरीद शुरू हो जाएगी। यदि केंद्र से देरी होती है, तो हरियाणा सरकार 25 सितंबर से अपने स्तर पर खरीद की व्यवस्था करेगी। चंडीगढ़ से आए खाद्य आपूर्ति और कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी किसान यूनियन को सरकारी पत्रों की प्रतियां सौंपी हैं।
दूसरी तरफ, किसान संगठन तुरंत खरीद शुरू करने की मांग पर अड़े हुए हैं। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने स्पष्ट किया है कि 22 सितंबर की रात किसान बराड़ा रोड स्थित शहीद उधम सिंह स्मारक पर ही धरने पर गुजारेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि 23 सितंबर (बुधवार) को किसानों की एक बड़ी पंचायत बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति और अगले कदम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
पोर्टल पुनः खुला और पिछले साल के आंकड़े
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल को 21 से 27 सितंबर तक दोबारा खोल दिया है, ताकि छूटे हुए किसान अपनी फसल का पंजीकरण करा सकें। हालांकि, किसानों की मांग है कि पोर्टल पंजीकरण, सत्यापन और मंडियों में खरीद की प्रक्रिया के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए ताकि उन्हें मंडियों में लंबा इंतजार न करना पड़े। गौरतलब है कि पिछले साल 2025 में भी किसानों के दबाव के बाद धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर के बजाय 22 सितंबर से शुरू की गई थी, जिसके तहत प्रदेश भर में लगभग 59.62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था।
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