रायपुर। प्रदेश में लंबे समय से धर्मान्तरण को लेकर लगातार चल रहे आरोप-प्रत्यारोप, वाद-विवाद के बीच गुरुवार को साय सरकार ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 पेश कर दिया. संभावना है कि बजट सत्र के अंतिम दिन इसे सदन द्वारा पारित भी कर दिया जाएगा, इससे पहले लल्लूराम डॉट कॉम आपको विधेयक के संबंध में अहम जानकारी दे रहा है.

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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 का स्थान लेगा. छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 में धर्मातरण उपरांत मात्र जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना प्रावधानित है. छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 में जबरन धर्मांतरण को एक संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध बनाया गया है. जबरन धर्मांतरण के लिए साधारण दण्ड का प्रावधान है.

छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक, आर्थिक परिस्थिति एवं समय बीतने के साथ समाज में प्रौद्योगिकी तथा संचार के साधनों के विकास के कारण एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, लालच, कपटपूर्ण रीति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए प्रचलित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातन्त्रय अधिनियम 1968 के प्रावधान वर्तमान परिदृश्य में अपर्याप्त हो जाने से एक व्यापक कानून बनाना आवश्यक हो गया है.

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में छह अध्यायों में 31 बिंदुओं में वैध-अवैध धर्मांतरण को परिभाषित करते हुए निहित सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. विधेयक में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है.

यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है.

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है. विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी.

विधेयक के मुताबिक, महिमामंडन कर, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा और प्रतिबंधित होगा.

यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा.

विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.

एक धर्म का व्यक्ति अगर दूसरे धर्म में शादी करता है, तो ऐसे विवाह को सम्पन्न करवाने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसे विवाह को करवाने वाला जिम्मेदार व्यक्ति विवाह की तारीख से आठ दिन पहले घोषणापत्र सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेगा. सक्षम प्राधिकारी ये तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, ऐसा हुआ तो अवैध घोषित किया जा सकेगा.