हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में विजयादशमी के पावन अवसर पर पुलिस लाइन (DRP Line) में आयोजित भव्य शस्त्र पूजन कार्यक्रम के दौरान एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी वाले इस महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम के समापन के वक्त मंच संचालन और साउंट सिस्टम के बीच ऐसा तालमेल बिगड़ा कि राष्ट्रगान (National Anthem) की घोषणा के बाद लाउडस्पीकर पर राष्ट्रगीत (National Song) की धुन बजने लगी। इस अप्रत्याशित गफलत से कार्यक्रम में कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई।

यह है पूरा घटनाक्रम

दरअसल विजयादशमी पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम का समापन होना था। कार्यक्रम के अंत में मंच संचालन कर रहे उद्घोषक द्वारा राष्ट्रगान शुरू करने की औपचारिक घोषणा की गई। लेकिन इसके विपरीत, ध्वनि व्यवस्था संभाल रहे ऑपरेटर की गलती या निर्देश समझने में हुई चूक के कारण राष्ट्रगान की बजाय राष्ट्रगीत की धुन बजनी शुरू हो गई। गलती का अहसास होते ही वहां मौजूद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। अधिकारियों ने तुरंत इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक राष्ट्रगीत की धुन काफी हद तक बज चुकी थी। इसके बाद हड़बड़ाहट में सही धुन यानी राष्ट्रगान शुरू कराया गया।

वीआईपी कार्यक्रम में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री मोहन यादव जैसे विशिष्ट अतिथि की मौजूदगी वाले इस हाई-प्रोफाइल और गरिमामयी सरकारी आयोजन में इस तरह की लापरवाही ने सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मंच संचालन (स्टेज एंकरिंग) और साउंड सिस्टम संभालने वाली टीम के बीच समन्वय (कोऑर्डिनेशन) का अभाव था? राष्ट्रीय प्रतीकों और गानों से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में निर्देशों को लेकर हुई यह गफलत किसकी लापरवाही का नतीजा है? फिलहाल, इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन या आयोजन समिति की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इस घटना के बाद से प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

स्वागत के समय कैसे हुई चूक?

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया जा रहा था। इसी दौरान विधायक रमेश मेंदोला की जगह विधायक गोलू शुक्ला को बुके दे दिया गया। अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के नाम बोले गए लेकिन बुक के किसी और जनप्रतिनिधियों को दे दिया गया। बाद में गलती को सुधारा गया और बुके सही विधायक को दिया गया। हालांकि स्वागत के दौरान हुई इस चूक ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के स्वागत के दौरान नाम और पहचान को लेकर गफलत कैसे हुई? क्या स्वागत की सूची और मंच संचालन के बीच तालमेल की कमी थी? या फिर इंदौर आए नए अधिकारी इंदौर के जनप्रतिनिधियों को नहीं पहचान पाए

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