“The present moment is all you ever have.” आनंद कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे पाने के लिए प्रयास करना पड़े। सच्चाई यह है कि आनंद हमारे अस्तित्व का स्वाभाविक गुण है। फूल को खिल कर अपनी सुगंध फैलाने के लिए अलग से प्रयास नही करना पड़ता। वैसे ही मन के शांत और सहज होने पर आनंद किसी सुगंध की तरह अपने आप प्रकट होने लगता है।
संतोषामृततृप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम्। कुतस्तद्धनलुब्धानामितश्चेतश्च धावताम्॥
इस संस्कृत सुभाषित का अर्थ है संतोष और शांत मन से मिलने वाला सुख उस व्यक्ति को कहाँ मिल सकता है, जो धन और इच्छाओं के पीछे निरंतर भागता रहता है?
सभी यही सोचते हैं कि कोई बड़ी सफलता मिल जाए, धन-संपत्ति बढ़ जाए, समाज में प्रतिष्ठा मिल जाए या हमारी वांछित इच्छाएँ पूरी हो जाएँ तो जीवन आनंदमय बन जाएगा। मगर सच तो यह है कि इच्छाओं की यह दौड़ कभी भी समाप्त नहीं होती। एक इच्छा के पीछे दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है। अज्ञानता वश हम भविष्य के सुख की तलाश में वर्तमान की सुंदरता को खो रहे हैं। याद रहे “Happiness is not a destination; it is a way of life.” इसका अर्थ है आनंद कोई मंजिल नहीं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
जीवन को आनंदमय बनाने के लिए हर परिस्थिति को अपनी इच्छा के अनुसार बदलने का प्रयास कभी ना करें। अपना कर्म करते हुए परिणाम की चिंता, दूसरों से तुलना और हर समय कुछ अधिक पाने की बेचैनी से मुक्त जीना ही आनंदमय जीवन है।
सहजता को आलस्य समझने की भूल कदापि न क़रें वस्तुतः यह स्वयं को स्वीकार करने की कला है। अपने भीतर की शांति से पहचान होते ही छोटी-छोटी चीजों में भी खुशियाँ मिलने लगेगी। सुबह की ताजी हवा, पक्षियों का कलरव जैसी जीवन की साधारण घटनाएँ भी आनंद का अनुभव कराने लगेंगी। अपने लक्ष्य और मंजिल तक पहुँचने की अंतहीन दौड़ आज ही समाप्त क़रें।
“Nature does not hurry, yet everything is accomplished.” यानी प्रकृति जल्दबाजी नहीं करती, फिर भी सब कुछ अपने समय पर पूरा होता है। भविष्य से उम्मीद किए बग़ैर अपने कर्तव्यों का पालन और मन लगाकर कर्म कीजिए। “Peace begins with a smile.” इस कहावत का अर्थ है आंतरिक शांति की शुरुआत एक मुस्कान से भी हो सकती है। मुस्कुराइए, गहरी साँस लीजिए और वर्तमान को स्वीकार कीजिए।
प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥ श्रीमद्भगवद्गीता के इस प्रसिद्ध श्लोक के आधार पर कहा गया है कि अंतःकरण प्रसन्न और शांत होने पर दुःखों का प्रभाव कम होता है तथा बुद्धि स्थिर होने लगती है। जिसे हर समय सुलझाना पड़े, जीवन कोई समस्या नहीं।
जीवन वह सुंदर अनुभव है जिसे पूरी सजगता से जीना है। स्मरण रहे, एक उलझा हुआ मन जीवन के प्रत्येक क्षण को एक मधुर नृत्य कभी नही बना सकता। “Less is more.” इसका अर्थ है कई बार कम इच्छाओं और कम उलझनों में ही अधिक सुख मिलता है।
“The present moment is all you ever have.” अर्थ: वास्तव में हमारे पास वर्तमान क्षण ही है; इसे पूरी तरह जीना सीखिए। बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं॥ विषय से प्रासंगिक रामचरितमानस की इस चौपाइयाँ का आशय है संतोष के बिना इच्छाओं का अंत नहीं होता और अतृप्त इच्छाओं के रहते सच्चा सुख मिलना कठिन है।
जीवन में आनंद पाने के लिए ज़्यादा कुछ करने की आवश्यक नहीं है बस अपने दृष्टिकोण को सरल बनाइए, कर्म करते रहिए, इच्छाओं पर विवेक का अंकुश रखिए और वर्तमान क्षण को खुले मन से स्वीकार कीजिए। उपलब्धि यह नही है कि कुछ नया पा लिया जाए बल्कि असली उपलब्धि अपने भीतर पहले से मौजूद शांति को पहचान लेना है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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