Empty vessels make the most noise. खाली बर्तन ही करते हैं अधिक आवाज। दूसरों पर टिप्पणी करने के अलावा स्वयं को परखने के लिए भी यह कहावत बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर कम जानकारी रखने वाला व्यक्ति अपनी बात को बहुत अधिक जोर देकर सही साबित करने का प्रयास करता है। “थोथा चना बाजे घना” को चरितार्थ करने वाले व्यक्तियों की पहचान होती है, आवाज ऊंची, बड़े-बड़े शब्दों की अधिकता और विचारों में गहराई की शून्यता। कभी-कभी उनका यह व्यवहार अपने भीतर छिपी असुरक्षा को ढकने का प्रयास भी हो सकता है।

जानकार और समझदार व्यक्ति से सामना होने पर ज्ञान की कमी ऊंची आवाज, आरोप और दबाव का सहारा लेने लगते हैं। “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” उस स्थिति मे कही जाती है जब अपनी कमी स्वीकार न करने के लिए सामने वाले पर हावी होने का प्रयास किया जाता है। अँग्रेज़ी की एक प्रसिद्ध कहावत है “Wise men speak because they have something to say; fools because they have to say something.”
बुद्धिमान इसलिए बोलते हैं क्योंकि उनके पास कहने योग्य बहुत कुछ है मगर मूर्ख इसलिए बोलते हैं क्योंकि उन्हें कुछ न कुछ कहना ही है। “Still waters run deep.” 
शांत दिखाई देने वालों के भीतर ही गहराई हो सकती है।

एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक
“विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥”

जिसका अर्थ है विद्या से विनम्रता आती है और विनम्रता से मनुष्य योग्य बनता है। वास्तविक ज्ञान व्यक्ति को विनम्र बनाता है जैसे गहरा समुद्र शांत दिखाई देता है। ऐसे व्यक्ति हर बात पर स्वयं को सिद्ध करने के लिए उतावले नहीं होते। वह सुनता है, समझता है फिर जरूरी होने पर ही बोलता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण मे भी वाणी पर संयम और अहंकार पर विजय मनुष्य की बड़ी साधना मानी गई है। “Actions speak louder than words.”
इसका भी यही अर्थ है कि शब्दों से अधिक कर्म बोलते हैं। दूसरों के शोर से प्रभावित होने की जगह अपने ज्ञान की गहराई बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। सच्ची विद्वता आवाज की ऊँचाई में नहीं, व्यवहार,दृष्टि और विचारों की गहराई में दिखाई देती है।

संदीप अखिल, सलाहकार संपादक न्यूज 24 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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