शिवम मिश्रा, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में EOW ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है.  ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में सौम्या के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट का आवेदन किया था. जिसके बाद आज उनपर गिरफ्तारी कार्रवाई की जा रही है. सौम्या चौरसिया अब 16 जनवरी तक रिमांड पर रहेंगी, जहां उनसे EOW पूछताछ करेगी.

बता दें कि छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की ओर से गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए सौम्या ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी. इस पर 8 जनवरी को हुई सुनवाई में राज्य शासन ने अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था. वहीं बीते दिन 15 जनवरी को शासन द्वारा पक्ष रखने के बाद हाई कोर्ट ने सौम्या चौरसिया की अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी.

जानिए क्या है शराब घोटाला मामला

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला एक हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जांच कर रही है. यह घोटाला मुख्य रूप से 2019 से 2022 के बीच का बताया जाता है, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी.

इन बिंदुओं के साथ समझें कैसे हुआ घोटाला

1. घोटाले का पैमाना (Scam Magnitude)

ED और जांच एजेंसियों के अनुसार, यह घोटाला लगभग ₹2,800 करोड़ से ₹3,200 करोड़ के बीच का है. इसमें आरोप है कि सरकारी खजाने को मिलने वाले राजस्व को चूना लगाकर निजी लाभ कमाया गया.

2. घोटाले का तरीका (Modus Operandi)

जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले को तीन मुख्य तरीकों (Part A, B, C) से अंजाम दिया गया था:

  • अवैध कमीशन (Part A): शराब आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) से प्रति पेटी एक निश्चित कमीशन वसूला गया.
  • नकली होलोग्राम और अवैध बिक्री (Part B): बिना किसी रिकॉर्ड के ‘ऑफ-द-बुक्स’ देशी शराब बेची गई. इसके लिए नकली होलोग्राम का इस्तेमाल किया गया ताकि सरकारी दुकानों से बिकने वाली शराब का पैसा खजाने में जाने के बजाय सीधे सिंडिकेट के पास जाए.
  • डिस्टिलर्स से घूस (Part C): शराब बनाने वाली कंपनियों (Distilleries) को लाइसेंस देने और व्यापार जारी रखने के बदले मोटी रकम ली गई.

3. प्रमुख आरोपी और सिंडिकेट

इस मामले में राजनीतिक हस्तियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के नाम शामिल हैं:

  • अनवर ढेबर: इन्हें घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड और सिंडिकेट का प्रमुख माना गया है.
  • अनिल टुटेजा: पूर्व IAS अधिकारी, जिन पर सिंडिकेट को प्रशासनिक संरक्षण देने का आरोप है.
  • सौम्या चौरसिया: तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में उप सचिव, जिन्हें धन के लेन-देन का प्रमुख समन्वयकर्ता बताया गया है.
  • निरंजन दास और अरुणपति त्रिपाठी: आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी.
  • चैतन्य बघेल: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे, जिन्हें हालिया चार्जशीट में सिंडिकेट के एक प्रमुख हैंडलर के रूप में नामजद किया गया है.
  • कवासी लखमा: पूर्व आबकारी मंत्री, जिनसे इस मामले में पूछताछ और जांच जारी है.