Dharm Desk :- ग्रह-नक्षत्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, पराक्रम और भूमि का प्रमुख कारण होता है। जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति मनुष्य के स्वभाव, पारिवारिक संबंधों, करियर और जीवन की दिशा त य करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुंडली के अलग-अलग 12 भावों में जब मंगल ग्रह विराजमान होते हैं, तो उनका असर हर मनुष्य के जीबन पर अलग रूप में देखने को मिलता हैं। कहीं यह मनुष्य को बहुत साहसी और भाग्यशाली बनाता है।तो कहीं कुछ विशेष चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता हैं।

कुंडली का हर घर मंगल के प्रभाव से एक विशिष्ट क्षेत्र को प्रभावित करता हैं। अगर प्रथम भाव में मंगल जातक को इंसाफ पसंद और सच्चा बनाता है।जबकि दूसरे भाव में यह भाइयों के प्रति पिता जैसी जिम्मेदारी निभाने वाला होता है। इसी प्रकार, अलग-अलग घरों में मंगल की स्थिति मनुष्य के धन, परिवार, स्वास्थ्य और संतान सुख पर गहरा असर डालती है।

कुंडली के 12 भावों में मंगल का प्रभाव

प्रथम भाव
इस स्थान पर मंगल होने पर जातक न्यायप्रिय, कभी झूठ न बोलने वाला और एक सच्चा इंसान बनता है।

द्वितीय भाव
यहां स्थित मंगल भाइयों का पालक होता है। जो अपने भाइयों के लिए उनके पिता की तरह भूमिका निभाता है।

तृतीय भाव
इसे चिड़ियाघर का कैदी शेर कहते है। जो बहुत ताकतवर होने के बाद बंधनों में रहता है और छोटी-छोटी बातों से परेशान हो जाता है।

चौथा भाव
इस घर में मंगल को बदी का सरदार माना गया है। जिसे परेशानियां खुद ढूंढकर घेर लेती है।

पंचम भाव
यह रईसों का बाप-दादा स्थान है जहां धन-पैसे और परिवार की तरफ से ऐसा मनुष्य जीवन में बहुत तरक्की करता है।

छठा भाव
तरसने की संतान, यानी ऐसा मनुष्य खुद तरस-तरस कर पैदा होता है या उसे अपनी संतान खासकर पुत्र प्राप्ति बहुत देर से मिलती हैं।

सातवां भाव
इस स्थान पर मंगल का फल मीठे हलवे जैसा होता है।जो गरमागरम खाने पर मुंह जलाए और तसल्ली से खाने पर स्वाद दे यानी फल देर से मिलता है लेकिन बहुत अच्छा मिलता है।

आठवां भाव
इसे मौत का फंदा कहा गया है जहां मनुष्य हमेशा किसी न किसी एक्सीडेंट, नुकसान या बीमारी के घेरे में रहता हैं।

नौवां भाव
यह तख्त-ए-शाही का स्थान है जहां ऐसे मनुष्य को लोग बहुत लकी मानते हैं और धन-धान्य के मामले में वह अपार प्रगति करता है।

दसवां भाव
चींटी के घर भगवान की स्थिति है। मतलब ऐसा मनुष्य जब अपने माता-पिता के घर पैदा होता है। तो वह अपने पिता के लिए बहुत भाग्यशाली और लकी साबित होता है।

ग्यारवा भाव
इसे तीन दुनियावी कुत्ते कहा गया है। जिसमें जातक का जीवन ससुर, बहन-भाइयों और नाती-रिश्तेदारों के हालातों के इर्द-गिर्द चलता है।

बारहवां भाव
यह महावत की स्थिति है। मतलब ऐसा मंगल हाथी राहु को भी नियंत्रित करने की शक्ति रखता है और कुंडली में संतुलन को साधता है।