Chaitra Navratri 2026. चैत्र नवरात्र 2026 का आगाज हो चुका है. मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं. देशभर के देवी मंदिरों में मां की आराधना उपासना की जा रही है. प्रदेश में भी देवी मंदिरों में नवरात्र की धूम मची हुई है. मंदिरों में मां के भक्तों का तांता लगा हुआ है. रोज देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा हो रही है. यूपी में भगवती के कई चमत्कारी और पौराणिक मंदिर हैं. जिसमें से एक है राजधआनी लखनऊ के कैसरबाग स्थित श्री बड़ी काली मंदिर (Shri Badi Kali Temple, Lucknow). ये मंदिर माता काली को समर्पित है.

इस मंदिर का निर्माण अगस्त, 1863 में कराया गया था. मंदिर की स्थापना करीब 163 पहले की गई थी. जानकारी के मुताबिक मां काली के भक्त मधुसूदन बनर्जी ने सपने में मां के आदेश के बाद उन्होंने खुद ही एक मिट्टी की प्रतिमा तैयार की. इसे ही उन्होंने स्थापित किया. बताया जाता है कि यहां देवी को सांप, नेवला, वानर, एक पक्षी समेत कुल पांच जीवों के मुंडों की आधारशिला पर स्थापित किया गया था.
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अक्सर देखा जाता है कि लोकपरंपराओं के मुताबिक देवी मंदिरों में पशु बलि दी जाती है. हालांकि शास्त्रीय पद्धति में मठ-मंदिरों में बलि (भेंट) का विधान जरूर है, लेकिन पशु बलि का नहीं. पशु बलि तंत्र मार्ग में होती है. मठ-मंदिरों में इसका विधान नहीं है, ये शास्त्रीय मर्यादा है. इस मार्ग में केवल पत्र-पुष्प, फल आदि से पूजा की जाती है. लेकिन इस पर सबकी अपनी अलग मान्यताएं हैं. राजधानी के काली बाड़ी मंदिर की एक विशेषता है कि यहां पर पशु बलि का विधान नहीं है. ये मंदिर बंगाली परंपरा के अनुसार सिद्ध पीठ के रूप में विराजमान है.

जीवित बलि की जगह दी जाती है फलों की बलि
एक समय में इस मंदिर में बलि दी जाती थी. शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि को परंपरागत रूप से मंदिर में जीवित बलि की परंपरा थी. जो कि लंबे समय तक चली. लेकिन अब लंबे अरसे से यहां पशु बलि पूरी तरह से वर्जित है. अब महानवमी पर यहां हवन पूजन के बाद जीवित बलि के रूप में पंच फलों की प्रतिकात्मक बलि मां को अर्पित की जाती है.
ढाक वादन की प्रतियोगिता
इस मंदिर में हर बांग्ला उत्सव के दौरान आयोजन होते हैं. विशेषकर दुर्गा पूजा के दौरान केवल इसी मंदिर में ढाक वादन की प्रतियोगिता भी होती है. जो कि आकर्षण का केंद्र होती है. इसमें कई ढाकियों के दल ढाक वादन करते हैं. इस मंदिर का संचालन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है. वर्तमान में यहां पर तीन पुजारी मां की सेवा में हैं. सप्तमी तिथि पर मंदिर में महानिशा पूजा की जाती है. इस दौरान भगवती की विशेष उपासना होता ही.
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