रणधीर परमार, छतरपुर। एमपी के छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावितो को वितरित की गई मुआवजा राशि मे विसंगतियों को लेकर प्रशासन और पीड़ितों के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है। हालात उस समय बिगड़ गए जब शांति प्रिय ‘चिता आंदोलन’ को प्रशासन ने हटाने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस को दबे पांव भागना पड़ा। जिसका वीडियो भी अब सामने आया है।
‘चिता आंदोलन’ के दौरान पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का राशन-पानी रोकने और उन्हें हटाने की कोशिश की जिससे बवाल मच गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से हजारों आदिवासी महिलाएं और किसान भड़क उठे। आक्रोशित जनता के भारी विरोध के सामने प्रशासन को पीछे हटना पड़ा और आंदोलन स्थल से दौड़ लगानी पड़ी।
वीडियो में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी उग्र भीड़ को देख पैदल और अपनी-अपनी गाड़ियों से भागते नजर आए। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों के हक की यह लड़ाई अब ‘जन संघर्ष’ बन चुकी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर आंदोलन को कुचलने या दमन करने की कोशिश की तो इसके परिणाम और भी उग्र होंगे। जब तक विस्थापितों को पूरा न्याय नहीं मिलता, यह ‘चिता आंदोलन’ नहीं थमेगा। इस प्रदर्शन को लेकर कलेक्टर ने आंदोलन कर रहे लोगों को चेतावनी दी कि उनकी अधिकतर मांगे पूरी कर दी, लेकिन अगर कोई कानून अपने हाथ में लेगा तो फिर कार्रवाई की जायेगी।

