संजीव, सोनीपत. लम्पी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उपायुक्त नेहा सिंह ने मंगलवार को पशुपालकों से लुवास की गाइडलाइन का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बीमारी के लक्षण दिखने पर पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें। लुवास ने भी बीमारी से बचाव और जांच को लेकर पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
गाय और गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है बीमारी
लुवास विशेषज्ञों के अनुसार लम्पी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गाय और अन्य गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाली संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है। यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती। हालांकि, इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।
बीमारी में आमतौर पर तेज बुखार, त्वचा पर गोल और कठोर गांठें, लसीका ग्रंथियों में सूजन, कमजोरी और भूख कम होने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। दूध उत्पादन में भी कमी हो सकती है। गंभीर मामलों में पशु की स्थिति बिगड़ सकती है।
बीमार पशु को तुरंत अलग रखने की सलाह
लुवास विशेषज्ञों ने कहा है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को तुरंत अलग रखना चाहिए। इसके बाद पशु चिकित्सक की सलाह से उपचार करवाना चाहिए। पशुपालकों को स्वयं उपचार करने से बचने और लक्षण दिखने पर नजदीकी पशु चिकित्सक या संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
सही नमूने से जांच जरूरी
लुवास के अनुसार बीमारी की सही पुष्टि के लिए त्वचा की गांठ, गांठ से प्राप्त सामग्री या पपड़ी का नमूना लेना महत्वपूर्ण है। केवल रक्त या नाक के स्वैब पर निर्भर रहने से कुछ मामलों में वायरस की पहचान नहीं हो पाती।
नमूना लेते समय जैव-सुरक्षा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
मच्छर, मक्खी और टिक्स से बचाव जरूरी
लम्पी स्किन डिजीज मुख्य रूप से मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक्स जैसे खून चूसने वाले कीटों से फैल सकती है। इसलिए पशुशाला और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। नियमित सफाई और कीटाणुशोधन करने के साथ कीट नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
बीमार और स्वस्थ पशुओं के लिए चारा-पानी के बर्तन अलग रखने चाहिए। पशुओं की अनावश्यक आवाजाही से भी बचने को कहा गया है।

नए पशुओं को 15 दिन अलग रखने की सलाह
लुवास विशेषज्ञों ने नए पशुओं को करीब 15 दिन अलग रखकर निगरानी करने की सलाह दी है। स्वस्थ और टीकाकरण के योग्य पशुओं का एलएसडी के खिलाफ टीकाकरण पशुपालन विभाग के वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार करवाने को कहा गया है।
उपायुक्त नेहा सिंह ने पशुपालकों से बीमारी को लेकर सतर्क रहने और लुवास की गाइडलाइन अपनाने की अपील की है।
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