शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आई है। राज्य सरकार राष्ट्रीय पेंशन योजना के दायरे में आने वाले प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को एकीकृत पेंशन योजना यानी UPS का विकल्प दे सकती है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा एकीकृत पेंशन योजना अप्रैल 2025 में ही लागू की जा चुकी है, और अब इसे मध्य प्रदेश में भी लागू करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

एसीएस मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में चल रहा है अध्ययन

प्रदेश में यूपीएस लागू करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो इस पूरे प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रही है। यह समिति लगातार कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श करने के साथ-साथ अन्य राज्यों में लागू किए गए प्रावधानों का भी अध्ययन कर रही है। पुरानी पेंशन बहाली की लगातार उठ रही मांगों के बीच सरकार कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं और विकल्पों पर पूरी तरह विचार करना चाहती है। समिति द्वारा दिसंबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी, जिसके बाद इस पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।

क्या हैं यूपीएस UPS योजना के मुख्य लाभ और प्रावधान?

केंद्र सरकार द्वारा लाई गई एकीकृत पेंशन योजना के प्रावधानों के तहत कर्मचारियों को कई बड़े वित्तीय लाभ और सुरक्षा मिलती है:

न्यूनतम निश्चित पेंशन: योजना के तहत यदि किसी कर्मचारी ने कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, तो उसे 10,000 रुपये मासिक निश्चित पेंशन की गारंटी मिलती है।

अंतिम वेतन का 50%: यदि किसी कर्मचारी ने 25 वर्ष तक की सेवा पूरी कर ली है, तो उसे सेवानिवृत्ति से ठीक पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 हिस्सा निश्चित पेंशन के रूप में प्रदान किया जाएगा।

पारिवारिक पेंशन: सेवा के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी की मृत्यु हो जाने की स्थिति में उसके परिवार को कर्मचारी की मिलने वाली पेंशन का 60 फीसदी हिस्सा पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

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