शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों बिजली की बढ़ी हुई मांग के चलते उपजे संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग ने युद्ध स्तर पर कदम उठाए हैं। सरकार का दावा है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर प्रदेश में बिजली का यह अस्थायी संकट पूरी तरह दूर कर लिया जाएगा और सुचारू रूप से बिजली की सप्लाई बहाल हो जाएगी।
क्यों बिगड़ा सिस्टम?
अधिकारियों के मुताबिक, इस बार पिछले साल की तुलना में बिजली की अधिकतम मांग रिकॉर्ड स्तर पर 17,124 मेगावाट पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा मात्र 11,874 मेगावाट था। इस तरह बिजली की मांग में सीधे तौर पर 44 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सिर्फ कृषि क्षेत्र में ही बिजली की मांग 1,752 मेगावाट से बढ़कर सीधे 3,701 मेगावाट पर पहुंच गई है।
मौसम का असर
इस बार मानसून के दौरान बारिश में देरी होने के कारण धान की सिंचाई अक्टूबर तक खिंच गई। इसके अलावा मालवा-निमाड़ क्षेत्र में पर्याप्त बारिश न होने के चलते किसानों को रबी फसलों के लिए ‘पलेवा’ (बुआई से पहले सिंचाई) जल्दी शुरू करना पड़ा, जिससे अचानक बिजली का लोड अत्यधिक बढ़ गया।
बिजली कटौती से राहत के लिए सरकार ने उठाए ये बड़े कदम
जल विद्युत उत्पादन शुरू
सरदार सरोवर परियोजना से 800 मेगावाट और मणिखेड़ा व गांधी सागर बांधों से 101 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया गया है।
ताप विद्युत गृहों से मदद
सिंगाजी पावर प्लांट से 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन शुरू हो चुका है।
अतिरिक्त बिजली खरीदी की तैयारी
आगामी महीनों की मांग को देखते हुए नवंबर से फरवरी तक 300 से 800 मेगावाट तक बिजली की खरीदी के लिए टेंडर भी बुलाए गए हैं, ताकि आने वाले दिनों में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
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