संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश के नगर निगम और नगर परिषदों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर राज्य सरकार ने अब पूरी तरह से सख्ती बरतनी शुरू कर दिया है। नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों, सरकारी पैसों से महंगी खरीदी और निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा हंटर चलाया है। विभागीय जांच के बाद कुल 62 मामलों में 146 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है।

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गंभीर अनियमितताओं के आरोप में 7 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं 76 अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोक दी गई है, जबकि 17 सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारियों की पेंशन और अन्य लाभों में कटौती की गई है। सरकारी सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में 38 प्रकरणों के तहत 3 करोड़ 20 लाख रुपये की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, जांच में आरोप साबित न होने पर 22 लोकसेवकों को दोषमुक्त भी किया गया है।

फर्जी खरीदी और चहेती फर्मों पर शिकंजा

जांच के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। न्यूटन चिखली में एक अधिकारी द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर ऑनलाइन संस्था बनाकर GeM पोर्टल से खरीदी करने का मामला पकड़ में आया, जिस पर तीन वेतनवृद्धियां रोकने की कार्रवाई की गई। इसके अलावा कोटर में वाटर टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली की महंगी खरीदी पर जिम्मेदारों से वसूली के आदेश दिए गए हैं। सिवनी और तरीचरकलां में भी खरीदी से जुड़ी गड़बड़ियों पर एक्शन हुआ है।

80 ठेकेदार फर्में ब्लैकलिस्ट

निर्माण कार्यों में भारी देरी करने, काम शुरू न करने और फर्जी दस्तावेज व गलत जानकारी देने वाली 80 ठेकेदार फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इनमें अमृत योजना से जुड़ी 48 और नगर निगम ग्वालियर से जुड़ी 19 फर्में शामिल हैं। इन सभी पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक का प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार की इस सख्त कार्रवाई से नगरीय निकायों में हड़कंप मच गया है।

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