संबलपुर: महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की चेयरपर्सन जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम गुरुवार शाम ओडिशा पहुंची। टीम का उद्देश्य छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी जल-बंटवारे के विवाद का जमीनी स्तर पर आकलन करना है।
इस प्रतिनिधिमंडल में जस्टिस डॉ. देवी रंजन और इंदरमीत कौर कोचर सहित तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम 26 फरवरी को शाम 6:25 बजे वीर सुरेंद्र साई हवाई अड्डा, झारसुगुड़ा पहुंची। ओडिशा सरकार ने सभी सदस्यों को “स्टेट गेस्ट” का दर्जा दिया है और उनके आवास, सुरक्षा व परिवहन की विशेष व्यवस्था की गई है। सदस्य अपने परिवारों के साथ बुर्ला स्थित अशोक निवास में ठहरे हैं।
शुक्रवार सुबह टीम ने हीराकुद बांध परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान स्पिलवे, पावर हाउस, कमांड एरिया और महानदी नदी बेसिन की स्थिति का जायजा लिया गया। टीम ने चिपिलिमा पावर हाउस का भी दौरा कर जल प्रबंधन ढांचे की समीक्षा की। बाद में सदस्यों ने संबलपुर स्थित माँ समलेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की.
इस अवसर पर ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने कहा कि केवल न्यायिक हस्तक्षेप से राज्यों के बीच जल विवादों का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “देश में ऐसे कई मामले लंबित हैं, लेकिन दोनों राज्यों ने आपसी सहमति से समाधान निकालने पर सहमति जताई है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंबित मामले के चलते निचले इलाकों में किसी नए बैराज को अनुमति नहीं दी जाएगी और राज्य सरकार महानदी के पानी में ओडिशा का वैध हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह निरीक्षण 2023 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ में किए गए दौरे के बाद हो रहा है। टीम गैर-मानसून अवधि में जल प्रवाह, हीराकुद जल प्रबंधन, सिंचाई व औद्योगिक उपयोग, पेयजल आपूर्ति तथा महानदी-ब्राह्मणी नदी इंटरलिंकिंग परियोजना के प्रस्ताव की भी जांच कर रही है। इसके अलावा संबलपुर के किलासमा क्षेत्र में प्रस्तावित नहर स्थल और छत्तीसगढ़ के कलमा, साराडीही, बसंतपुर तथा अरपा-भैसाझार बैराज परियोजनाओं का भी पुनः निरीक्षण किया जा रहा है।
ओडिशा जल संसाधन विभाग द्वारा समन्वित यह दौरा 2 मार्च तक चलेगा। कार्यक्रम में पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के दर्शन भी शामिल हैं, जहां जिला प्रशासन को निर्बाध दर्शन और विशेष पूजा की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़, दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि इस ऑन-साइट निरीक्षण से अदालत के बाहर आपसी सहमति के आधार पर विवाद के समाधान का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
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